यमुनानगर। हरियाणा की स्वास्थ्य सेवाओं की एक बार फिर गंभीर लापरवाही सामने आई है। यमुनानगर जिले के छछरौली सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) में मंगलवार को डॉक्टरों की गैरमौजूदगी के चलते एक गर्भवती महिला को अस्पताल के फर्श पर ही बच्चे को जन्म देना पड़ा। इस घटना ने न सिर्फ स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि 24 घंटे डॉक्टरों की तैनाती के सरकारी दावों की भी पोल खोल दी है।PHC
नहीं मिले डाक्टर: पीड़ित महिला के पति शिवम ने बताया कि मंगलवार वे अपनी गर्भवती पत्नी को प्रसव पीड़ा होने पर छछरौली सीएचसी लेकर पहुंचे थे। अस्पताल (PHC) पहुंचने के बाद उन्होंने वहां मौजूद स्टाफ से डॉक्टर के बारे में जानकारी ली, लेकिन उस समय कोई भी डॉक्टर मौजूद नहीं था। शिवम का आरोप है कि उनकी पत्नी दर्द से कराहती रही और वे करीब 20 से 25 मिनट तक अस्पताल परिसर में डॉक्टरों को तलाशते रहे, लेकिन कोई चिकित्सक नहीं मिला।
लापरवाही आइ सामने: परिजनों का कहना है कि प्रसव पीड़ा तेज होने के कारण महिला को तत्काल चिकित्सकीय सहायता की जरूरत थी, लेकिन मजबूरी में अस्पताल के फर्श पर ही डिलीवरी करानी पड़ी। बाद में नर्सिंग स्टाफ की मदद से प्रसव हुआ। इस दौरान न तो कोई स्त्री रोग विशेषज्ञ मौजूद था और न ही कोई वरिष्ठ चिकित्सक। घटना के बाद अस्पताल प्रशासन की लापरवाही को लेकर परिजनों में गहरा रोष देखने को मिला।
पहले भी आई है शिकायतें: बता दें यह काई नहीं बात नही है इस यानि छछरौली सीएचसी में इससे पहले भी डॉक्टरों की अनुपस्थिति और अव्यवस्था की शिकायतें सामने आती रही हैं, लेकिन स्वास्थ्य विभाग की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। ग्रामीणों का आरोप है कि सरकार भले ही हर सीएचसी में 24 घंटे डॉक्टर तैनात होने के दावे करे, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट है।
विभागीय अधिकारियों का कहना है कि ड्यूटी रोस्टर की जांच की जाएगी और यदि किसी स्तर पर लापरवाही पाई गई तो संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

















