भुखमरी के बीच जीवन रक्षक बना Parle-G बिस्किट, इस देश में 2300 रुपये में बिक रहा

On: March 21, 2026 11:41 PM
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Parle-G

Parle-G : भारत में मात्र 5 रुपये में मिलने वाला Parle-G बिस्किट युद्धग्रस्त गाजा पट्टी में भुखमरी और भीषण मानवीय संकट के बीच एक जीवनरक्षक और बहुमूल्य वस्तु बन गया है। टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, गाजा में Parle-G का एक पैकेट 24 यूरो (लगभग 2342 रुपये) में बिक रहा है, जबकि भारत में इसकी कीमत 5 रुपये और अंतरराष्ट्रीय बाजार में लगभग 100 रुपये है।

यह चौंकाने वाली खबर फिलिस्तीनी मोहम्मद जवाद के एक सोशल मीडिया वीडियो के वायल होने के बाद सामने आई है। इस वीडियो में जवाद अपनी बेटी रफीक के साथ हैं, और उनकी बेटी Parle-G का पैकेट पकड़े हुए बेहद खुश नजर आ रही है। जवाद ने वीडियो में बताया कि उन्होंने यह बिस्किट का पैकेट 24 यूरो में खरीदा है।

भुखमरी और मानवीय संकट का प्रतीक:

यह घटना गाजा में व्याप्त गंभीर खाद्य असुरक्षा और मानवीय संकट को उजागर करती है। युद्ध और घेराबंदी के कारण गाजा में आवश्यक वस्तुओं की भारी कमी है, जिससे खाद्य पदार्थों की कीमतें आसमान छू रही हैं। Parle-G जैसे सस्ते और पोषणयुक्त बिस्किट की इतनी अधिक कीमत पर बिक्री इस बात का स्पष्ट संकेत है कि लोग भोजन के लिए किसी भी कीमत पर भुगतान करने को तैयार हैं।

सोशल मीडिया पर वायरल और प्रतिक्रिया:

जवाद का यह वीडियो तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है, जिसने दुनिया भर के लोगों का ध्यान गाजा की विकट स्थिति की ओर खींचा है। इस पोस्ट पर कई यूजर्स ने अपनी प्रतिक्रियाएं दी हैं। एक यूजर ने लिखा कि “भारत ने मदद के तौर पर Parle-G भेजा, हमास ने ट्रक कब्जा कर ऊंचे दामों पर बेचा।” यह टिप्पणी गाजा में राहत सामग्री के वितरण और कालाबाजारी को लेकर चल रही चिंताओं को दर्शाती है।

खाद्य पदार्थों की आसमान छूती कीमतें:

जवाद ने अपने वीडियो में अन्य खाद्य पदार्थों की कीमतों का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि गाजा में आटा 500 डॉलर और चीनी 90 डॉलर प्रति किलो बिक रही है। ये कीमतें दर्शाती हैं कि गाजा में आम लोगों के लिए बुनियादी खाद्य पदार्थ खरीदना कितना मुश्किल हो गया है।

Parle-G, जो भारत में एक सामान्य और किफायती बिस्किट है, गाजा में जीवन के लिए संघर्ष कर रहे लाखों लोगों के लिए एक दुर्लभ और कीमती पोषण स्रोत बन गया है। यह घटना युद्ध के विनाशकारी प्रभावों और मानवीय सहायता की तत्काल आवश्यकता को रेखांकित करती है।

Sunil Chauhan

सुनील चौहान हरियाणा के रेवाड़ी और धारूहेड़ा क्षेत्र की खबरों को कवर करते हैं। उन्हें पत्रकारिता में 10 साल का अनुभव है और वे सामाजिक, प्रशासनिक और स्थानीय मुद्दों पर रिपोर्टिंग करते हैं।

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