Breaking News: हरियाणा में प्रतिबंध के बावजूद भ्रूण हत्या तेजी से पनप रहा है। अब भ्रूण हत्या जैसी सामाजिक बुराई को जड़ से खत्म करने के लिए अब आंगनबाड़ी वर्करों को विशेष जिम्मेदारी सौंपी गई है। प्रशासन का मानना है कि घर-घर संपर्क में रहने वाली आंगनबाड़ी कार्यकर्ता हर परिवार की संतानों की जानकारी रखती हैं, ऐसे में वे भ्रूण हत्या की रोकथाम में अहम भूमिका निभा सकती हैं।
जिला उपायुक्त अभिषेक मीणा ने महिला एवं बाल विकास विभाग की योजनाओं की समीक्षा बैठक में निर्देश दिए कि जिले की हर गर्भवती महिला का पंजीकरण अनिवार्य रूप से आंगनबाड़ी केंद्रों पर होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि जब कोई महिला बच्चा जन्म देती है तो यह जांचा जाए कि उसका पूर्व में पंजीकरण हुआ था या नहीं।
डीसी ने कहा कि आंगनबाड़ी वर्करों को अपने क्षेत्र में उन बच्चों की विशेष निगरानी करनी होगी जो अन्य बच्चों की तुलना में कमजोर हैं। ऐसे बच्चों का विस्तृत रिकॉर्ड रखा जाए ताकि नियमित रूप से उनका स्वास्थ्य परीक्षण होता रहे। साथ ही, सभी गर्भवती महिलाओं और 6 साल से कम आयु के बच्चों का नियमित हेल्थ चेकअप और पौष्टिक आहार वितरण सुनिश्चित किया जाए।
बैठक में कार्यक्रम अधिकारी शालू यादव ने बताया कि जिले में वर्तमान में 1099 आंगनबाड़ी केंद्र सक्रिय हैं, जिनमें 3 से 6 साल की उम्र के 8,446 बच्चे पंजीकृत हैं, जबकि 6 माह से 3 साल तक के 13,000 बच्चों को पोषण आहार उपलब्ध कराया जा रहा है।
बैठक में “बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ”, “प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना”, “हरिहर योजना”, “किचन गार्डन” आदि योजनाओं की प्रगति पर भी चर्चा हुई। साथ ही, वन स्टॉप सेंटर, बाल संरक्षण अधिकारी कार्यालय, बाल कल्याण समिति और जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड की रिपोर्ट भी प्रस्तुत की गई।
इस अवसर पर एडीसी राहुल मोदी, नगराधीश प्रीति रावत, सीडीपीओ राधा यादव, आंगनबाड़ी सुपरवाइजर और बाल विकास अधिकारियों की उपस्थिति में निर्णय लिया गया कि आंगनबाड़ी वर्कर अब सामाजिक जागरूकता और निगरानी का भी अहम स्तंभ बनेंगी, ताकि भ्रूण हत्या जैसी घटनाएं समय रहते रोकी जा सकें।

















