Breaking News: पिता की मौत के बाद रेलवे फाटक पर की नौकरी, बिना कोचिंग के बेगूसराय के राजू ने रच दिया इतिहास, पहले ही प्रयास में बने DSP

On: June 28, 2026 5:14 PM
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Breaking News: पिता की मौत के बाद रेलवे फाटक पर की नौकरी, बिना कोचिंग के बेगूसराय के राजू ने रच दिया इतिहास, पहले ही प्रयास में बने DSP

Breaking News: अक्सर लोग संसाधनों की कमी, गरीबी और वक्त की तंगी का रोना रोकर अपने सपनों को बीच में ही दफ़्न कर देते हैं। लेकिन जिसके इरादों में फौलाद और आंखों में कुछ कर गुजरने का जुनून हो, उसे दुनिया की कोई भी ताकत नहीं रोक सकती। ऐसी ही एक रोंगटे खड़े कर देने वाली और हर युवा को प्रेरणा देने वाली कामयाबी की कहानी बुद्ध की भूमि बिहार से सामने आई है। दिन में 12 घंटे रेल का फाटक उठाने और गिराने की नौकरी करने वाले एक साधारण से लड़के ने वो मुकाम हासिल किया है, जिसे सुनकर आपकी आँखें भी गर्व से नम हो जाएंगी।Breaking News

12 साल पहले उठ गया था पिता का साया, मां ने मजदूरी कर पाला

यह कहानी है बिहार के बेगूसराय के रहने वाले राजू कुमार की। राजू का जीवन कभी आसान नहीं रहा। उनके पिता एक साधारण ट्रक ड्राइवर थे, जिनकी आज से करीब 12 वर्ष पहले एक दर्दनाक सड़क हादसे में मृत्यु हो गई थी। पिता की मौत के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। लेकिन राजू की मां ने हिम्मत नहीं हारी, उन्होंने तंगहाली के बीच भी अपने बेटे की पढ़ाई को रुकने नहीं दिया।Breaking News

Breaking News: पिता की मौत के बाद रेलवे फाटक पर की नौकरी, बिना कोचिंग के बेगूसराय के राजू ने रच दिया इतिहास, पहले ही प्रयास में बने DSP
Breaking News: पिता की मौत के बाद रेलवे फाटक पर की नौकरी, बिना कोचिंग के बेगूसराय के राजू ने रच दिया इतिहास, पहले ही प्रयास में बने DSP

पिता के जाने के बाद राजू को उनके बड़े भाई ‘ऑक्सीजन मैन’ राजेश कुमार सुमन का मार्गदर्शन मिला, जिसके बाद राजू की रेलवे ग्रुप-डी में गेटमैन के पद पर नौकरी लग गई। सबसे बडी बात यह है कि बिना संसाधन व कोचिंग के बावजूद पहले ही प्रयास में सफलता हासिल की है।Breaking News

रक्सौल में रेलवे गेटमैन की 12 घंटे की नौकरी

राजू की पोस्टिंग रक्सौल में रेलवे फाटक (ग्रुप डी गेटमैन) पर हुई। कड़कड़ाती धूप हो या कपा देने वाली ठंड, राजू को दिन में 12-12 घंटे रेलवे ट्रैक और फाटक की सुरक्षा संभालनी पड़ती थी। लेकिन इस थका देने वाली नौकरी के बीच भी राजू की आंखों की चमक फीकी नहीं पड़ी। रेलवे फाटक उठाने और गिराने के बीच जो भी समय मिलता, राजू अपनी किताबें खोलकर बैठ जाते। उनकी आंखों में सिर्फ एक ही सपना तैर रहा था— खाकी वर्दी पहनकर समाज की सेवा करना और अपने स्वर्गीय पिता के नाम को रोशन करना।

बिना किसी कोचिंग के पहली ही बार में बने डीएसपी

आमतौर पर माना जाता है कि बिना लाखों रुपए की महंगी कोचिंग और बड़े शहरों में रहे बिना सिविल सर्विस (BPSC) जैसी कठिन परीक्षा पास करना नामुमकिन है। लेकिन राजू ने इस धारणा को पैरों तले कुचल दिया। उन्होंने बिना किसी कोचिंग के, सिर्फ इंटरनेट और अपनी किताबों के सहारे ‘सेल्फ स्टडी’ शुरू की।Breaking News

तैयारी के दौरान राजू अक्सर मशहूर डीएसपी संतोष पटेल साहब के वीडियो देखकर खुद को मोटिवेट करते थे। नतीजा यह हुआ कि अपने पहले ही प्रयास में राजू ने न सिर्फ 70वीं बीपीएससी (BPSC) परीक्षा पास की, बल्कि हिंदी माध्यम में टॉप करके सीधे डीएसपी (DSP) का पद हासिल कर लिया।

सोशल मीडिया पर बंधी तारीफों की झड़ी

राजू की इस अकल्पनीय कामयाबी की जानकारी उनके बड़े भाई ‘ऑक्सीजन मैन’ राजेश कुमार सुमन जी ने एक मोटिवेशनल संदेश के जरिए साझा की है, जिसके बाद से पूरे देश में राजू भाई को बधाइयां मिल रही हैं। यह सफलता उन लाखों युवाओं के मुंह पर एक करारा तमाचा है जो सोचते हैं कि बिना पैसे और बिना कोचिंग के सिलेक्शन नहीं हो सकता। आज राजू जब डीएसपी की वर्दी पहनेंगे, तो यकीनन आसमान से उनके दिवंगत पिता की आत्मा उन पर गर्व कर रही होगी। ऐसे जांबाज बेटे और उनकी संघर्षशील मां को पूरा देश नमन कर रहा है।

 

Harsh Chauhan

हर्ष चौहान Best24News में पत्रकार एवं कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं। वे हरियाणा, रेवाड़ी, धारूहेड़ा, अपराध, सामाजिक गतिविधियों और स्थानीय मुद्दों से जुड़ी खबरों की पिछले 6 साल रिपोर्टिंग कर रहे हैं।

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