Haryana News: संस्कृत आयाम, विश्व हिन्दू परिषद, हरियाणा द्वारा वर्ष 2026-27 की प्रस्तावित जनगणना के संदर्भ में एक व्यापक जनजागरण अभियान प्रारंभ किया गया है। इस अभियान का उद्देश्य नागरिकों को प्रेरित करना है कि वे जनगणना के दौरान अपनी भाषाओं की जानकारी देते समय संस्कृत को भी अपनी भाषा के रूप में अवश्य दर्ज कराएं।Haryana News
संरक्षण और संवर्धन को सशक्त बनाना जरूरी: अभियान के अंतर्गत बताया जा रहा है कि जनगणना में प्राप्त भाषा संबंधी आंकड़ों के आधार पर ही सरकार विभिन्न भाषाओं के संरक्षण, विकास और प्रचार-प्रसार के लिए नीतियाँ निर्धारित करती है। ऐसे में यदि अधिकाधिक नागरिक संस्कृत को अपनी ज्ञात भाषा के रूप में अंकित करेंगे, तो इससे इस प्राचीन भाषा के संरक्षण और संवर्धन को सशक्त आधार मिलेगा।Haryana News
संस्था के पदाधिकारियों ने कहा कि संस्कृत विश्व की सबसे प्राचीन एवं वैज्ञानिक भाषाओं में से एक है, जिसमें वेद, उपनिषद, गीता, पुराण और विशाल साहित्यिक धरोहर निहित है। यह केवल एक भाषा नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक पहचान और ज्ञान परंपरा की आधारशिला है। इसे संरक्षित रखना हम सभी का नैतिक और सांस्कृतिक दायित्व है।Haryana News
इस अवसर पर डॉ.अश्विनी जोशी प्रांत संस्कृत आयाम प्रमुख ने अपने वक्तव्य में गंभीरता के साथ समाज से आह्वान करते हुए कहा—
“हम सभी इस विषय को अत्यंत गंभीरता से लें और संस्कृत को पुनः सशक्त रूप मुख्यधारा में स्थापित करने का संकल्प लें। संस्कृत केवल एक भाषा नहीं, बल्कि हमारे जीवन का अभिन्न अंग है। हमारे धार्मिक अनुष्ठान, वैदिक संस्कार और दैनिक पूजा-पद्धति संस्कृत के मंत्रों और श्लोकों के बिना पूर्ण नहीं होते। यह भाषा हमारी परंपरा, हमारी चेतना और हमारी आत्मा से सीधे जुड़ी हुई है।
पुरातन विरासत की धारा: संस्कृत की विशेषता यह है कि इसे सुनते ही उसका भाव सहज रूप से हृदय में उतर जाता है, और इसके श्लोक सरलता से कंठस्थ हो जाते हैं यह हमारी पुरातन विरासत की वह धारा है, जो आज भी हमें हमारी जड़ों से जोड़ती है। अतः हम सभी का यह कर्तव्य है कि जनगणना के समय संस्कृत को अपनी ज्ञात भाषा के रूप में अवश्य दर्ज कराकर इसके संरक्षण और संवर्धन में सक्रिय भूमिका निभाएं।”Haryana News
अभियान के माध्यम से नागरिकों को यह भी समझाया जा रहा है कि जब जनगणना अधिकारी उनसे प्रश्न करें—
“आपकी मातृभाषा क्या है?” — तो वे अपनी पारिवारिक/स्थानीय भाषा बताएं।
“आप कौन-कौन सी भाषाएं जानते हैं?” — तो अपनी ज्ञात भाषाओं में संस्कृत को भी अवश्य शामिल करें।
संस्था ने सभी समाजबंधुओं से आह्वान किया है कि वे इस संदेश को अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाएं और अपने परिवार, मित्रों एवं समाज में जागरूकता फैलाएं, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए हमारी सांस्कृतिक विरासत सुरक्षित रह सके।
अंत में संगठन ने संदेश दिया—
“संस्कृत बचेगी, तो संस्कृति बचेगी; संस्कृति बचेगी, तो राष्ट्र बचेगा।”
जयतु संस्कृतम्! जयतु भारतम्!
जारीकर्ता:
अनुराग कुलश्रेष्ठ
(प्रांत प्रचार प्रसार प्रमुख)
विश्व हिन्दू परिषद, हरियाणा
संपर्क: 8750404343




















