हरियाणा में पिछले करीब दस महीनों के दौरान अलग-अलग जिलों में कई बार भूकंप के हल्के से मध्यम झटके महसूस किए गए हैं। अधिकतर मामलों में भूकंप का केंद्र दिल्ली-एनसीआर या आसपास के इलाके रहे और तीव्रता भी कम रही, जिससे किसी बड़े नुकसान की सूचना नहीं मिली। फिर भी लगातार आ रहे झटकों ने लोगों को कई बार चिंता में डाल दिया। आइए जानते हैं कब-कब हरियाणा में भूकंप के झटके महसूस किए गए।
• 27 जून 2025: महेंद्रगढ़ जिले में शाम के समय भूकंप के झटके महसूस किए गए। रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 2.8 मापी गई और केंद्र जमीन से लगभग 5 किलोमीटर की गहराई में बताया गया।
• 10 जुलाई 2025: सुबह 9 बजकर 5 मिनट पर भूकंप आया जिसका केंद्र झज्जर रहा। इसकी तीव्रता 4.4 मापी गई। झटके गुरुग्राम, रोहतक, पानीपत, झज्जर, हिसार और रेवाड़ी तक महसूस किए गए।
• 11 जुलाई 2025: शाम 7 बजकर 49 मिनट पर फिर झटके महसूस हुए। इस बार भी केंद्र झज्जर रहा और तीव्रता 3.7 दर्ज की गई। इसका असर गुरुग्राम, रोहतक, जींद, रेवाड़ी, सोनीपत और झज्जर में देखा गया।
• 16-17 जुलाई 2025: रात 12 बजकर 46 मिनट पर भूकंप के झटके महसूस किए गए। इसका केंद्र रोहतक रहा और रिक्टर स्केल पर तीव्रता 3.6 मापी गई। हालांकि इस घटना में किसी तरह के नुकसान की खबर नहीं आई।
• 17 जुलाई 2025: दोपहर 12 बजकर 34 मिनट पर फिर भूकंप आया। इस बार केंद्र झज्जर रहा और तीव्रता 2.5 मापी गई। भूकंप का केंद्र लगभग 5 किलोमीटर की गहराई में था।
• 22 जुलाई 2025: फरीदाबाद में सुबह करीब 6 बजे भूकंप के झटके महसूस किए गए। रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 3.2 रही और हलचल जमीन से करीब 5 किलोमीटर की गहराई में दर्ज की गई।
• 10 अगस्त 2025: झज्जर में रविवार शाम 4 बजकर 10 मिनट पर भूकंप के झटके लगे। इसकी तीव्रता रिक्टर स्केल पर 3.1 मापी गई।
• 16 जनवरी 2026: सोनीपत जिले के गोहाना क्षेत्र में भूकंप के झटके महसूस किए गए। रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 3.5 दर्ज की गई।
• 19 जनवरी 2026: सोनीपत में सुबह भूकंप के झटके महसूस हुए। इसकी तीव्रता 2.8 रही और भूकंप का केंद्र नॉर्थ दिल्ली बताया गया।
• 9 मार्च 2026: रेवाड़ी में सोमवार सुबह भूकंप के झटके महसूस किए गए। रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 2.8 दर्ज की गई और केंद्र रेवाड़ी क्षेत्र में बताया गया।
लगातार आ रहे इन हल्के झटकों को देखते हुए विशेषज्ञों का कहना है कि दिल्ली-एनसीआर और आसपास का इलाका भूकंपीय दृष्टि से संवेदनशील है। हालांकि अधिकतर झटके कम तीव्रता के होने के कारण बड़े नुकसान की संभावना कम रहती है, लेकिन लोगों को सतर्क रहने और आपदा प्रबंधन के नियमों का पालन करने की सलाह दी जाती है।
भूकंप क्यों आता है, जानिए इसके कारण और बचाव के उपाय
भूकंप धरती के भीतर होने वाली भूगर्भीय हलचल के कारण आता है। पृथ्वी की सतह कई बड़ी और छोटी टेक्टोनिक प्लेटों से बनी हुई है। ये प्लेटें लगातार बहुत धीमी गति से खिसकती रहती हैं। जब दो प्लेटें आपस में टकराती हैं, एक-दूसरे से दूर होती हैं या एक प्लेट दूसरी के नीचे खिसकती है, तब जमीन के अंदर ऊर्जा जमा हो जाती है। जब यह ऊर्जा अचानक बाहर निकलती है तो धरती में कंपन होता है, जिसे भूकंप कहा जाता है। भारत का दिल्ली-एनसीआर और आसपास का क्षेत्र भी भूकंपीय दृष्टि से संवेदनशील माना जाता है, इसलिए यहां समय-समय पर हल्के झटके महसूस किए जाते हैं।
भूकंप के मुख्य कारणों में टेक्टोनिक प्लेटों की गतिविधि सबसे बड़ा कारण है। इसके अलावा ज्वालामुखी विस्फोट, जमीन के भीतर गैस या पानी के दबाव में अचानक बदलाव, खनन गतिविधियां और बड़े बांधों के कारण भी कभी-कभी भूकंपीय हलचल हो सकती है। हालांकि अधिकांश भूकंप प्राकृतिक कारणों से ही आते हैं और इन्हें रोकना संभव नहीं होता।
भूकंप से बचाव के लिए कुछ सावधानियां अपनाना जरूरी होता है। भूकंप के समय घबराने के बजाय सुरक्षित स्थान पर रहना सबसे जरूरी है। यदि आप घर के अंदर हैं तो मजबूत मेज, टेबल या दीवार के कोने के पास बैठ जाएं और सिर को हाथों से ढक लें। लिफ्ट का उपयोग बिल्कुल न करें और खिड़कियों या भारी सामान से दूर रहें। अगर आप बाहर हैं तो खुले स्थान में चले जाएं और इमारतों, बिजली के खंभों तथा पेड़ों से दूरी बनाकर रखें।
भूकंप के बाद भी सावधानी जरूरी होती है। गैस सिलेंडर, बिजली के तार और इमारत की दीवारों में दरार की जांच करें। प्रशासन की ओर से जारी निर्देशों का पालन करें और अफवाहों से बचें। विशेषज्ञों के अनुसार मजबूत निर्माण मानकों का पालन, आपदा प्रबंधन की तैयारी और लोगों में जागरूकता बढ़ाने से भूकंप से होने वाले नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
















