Surajkund International Self-Reliant Crafts Fair: 39वें सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय आत्मनिर्भर शिल्प मेले का भव्य उद्घाटन

On: January 31, 2026 6:16 PM
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हरियाणा के सूरजकुंड में आज 39वें सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय आत्मनिर्भर शिल्प मेला-2026 का भव्य आगाज हुआ

The 39th Surajkund International Self-Reliant Crafts Fair: हरियाणा के सूरजकुंड में आज 39वें सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय आत्मनिर्भर शिल्प मेला-2026 का भव्य आगाज हुआ, जो 15 फरवरी तक चलेगा। भारत के उपराष्ट्रपति सी.पी.राधाकृष्णन ने बतौर मुख्य अतिथि मेले का उद्घाटन किया।

उद्घाटन करने उपरांत उपराष्ट्रपत सी. पी. राधाकृष्णन ने अपने संबोधन में कहा कि सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय शिल्प मेला दशकों से भारत की सांस्कृतिक आत्मा, कलात्मक उत्कृष्टता और सभ्यतागत निरंतरता का जीवंत प्रतीक रहा है। यह उत्सव ‘वसुधैव कुटुंबकम’ के उस शाश्वत भारतीय दर्शन को साकार करता है, जिसमें पूरी दुनिया को एक परिवार माना गया है। यह मेला निर्माण करने वाले हाथों, नवाचार से भरे मस्तिष्कों और हमारी पहचान गढ़ने वाली परंपराओं को एक साझा मंच पर एकत्र करता है।Surajkund International Self-Reliant Crafts Fair

 

पिछले लगभग चार दशकों से यह आयोजन हमारे कारीगरों, बुनकरों, मूर्तिकारों, चित्रकारों और लोक कलाकारों को वैश्विक पहचान दिला रहा है, जिनमें से अनेक पीढ़ियों से चली आ रही कलाओं को जीवित रखे हुए हैं। इस वर्ष आत्मनिर्भर भारत पर केंद्रित दृष्टिकोण ने मेले के महत्व को और भी गहन बना दिया है, क्योंकि हमारे कारीगर सदियों पुराने ज्ञान के संरक्षक हैं और उन्हें सशक्त बनाना एक समावेशी, सशक्त और टिकाऊ अर्थव्यवस्था की नींव है।

हरियाणा के सूरजकुंड में आज 39वें सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय आत्मनिर्भर शिल्प मेला-2026 का भव्य आगाज हुआ
हरियाणा के सूरजकुंड में आज 39वें सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय आत्मनिर्भर शिल्प मेला-2026 का भव्य आगाज हुआ

उपराष्ट्रपति ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक हस्तशिल्प क्षेत्र को राष्ट्रीय पुनर्जागरण के केंद्र में रखा गया है। प्रधानमंत्री विश्वकर्मा कौशल सम्मान योजना जैसे परिवर्तनकारी प्रयासों ने कारीगरों और शिल्पकारों को कौशल विकास, वित्तीय सहायता और बाज़ार से जुड़ाव प्रदान कर पूरे इकोसिस्टम को सशक्त बनाया है। उपराष्ट्रपति ने इस वर्ष के सहभागी राज्य उत्तर प्रदेश और मेघालय का उल्लेख करते हुए कहा कि ये ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना को सशक्त रूप से अभिव्यक्त करते हैं, जहाँ विविधता हमारी सबसे बड़ी शक्ति है। साथ ही, भागीदार देश मिस्र का स्वागत करते हुए उन्होंने कहा कि मिस्र की प्राचीन सभ्यता, सांस्कृतिक गहराई और कलात्मक परंपराएं भारत की ऐतिहासिक यात्रा से गहरे स्तर पर मेल खाती हैं। ऐसी साझेदारियां देशों के बीच सांस्कृतिक कूटनीति को सुदृढ़ करने के साथ-साथ लोगों के बीच संबंधों को भी मजबूत बनाती हैं।

सांस्कृतिक विरासत के साथ-साथ व्यावसायिक सफलता का सशक्त उदाहरण है सूरजकुंड मेला

उपराष्ट्रपति ने कहा कि बड़े पैमाने पर उत्पादन के इस युग में सूरजकुंड मेला हमें हाथ से बनी वस्तुओं, मानवीय स्पर्श और प्रामाणिक शिल्प के अमूल्य महत्व की याद दिलाता है। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष लगभग 15 लाख लोगों ने मेले का भ्रमण किया, जो यह दर्शाता है कि यह मेला आमजन से गहराई से जुड़ा हुआ है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि मेले में कारीगरों के उत्पादों की बिक्री प्रतिदिन बढ़ती है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि सूरजकुंड मेला न केवल सांस्कृतिक रूप से, बल्कि व्यावसायिक दृष्टि से भी अत्यंत सफल और प्रभावशाली आयोजन है। उपराष्ट्रपति ने इस दौरान कारीगरों, आयोजकों व दर्शकों से इस विरासत को समझने, अपनाने और आगे बढ़ाने का आह्वान भी किया।

सूरजकुंड शिल्प मेला हमारी प्राचीनता और आधुनिकता का संगम : नायब सिंह सैनी

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने शिल्प मेले के उद्घाटन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि सूरजकुण्ड शिल्प मेला हमारी प्राचीन विरासत और आधुनिक सोच का सजीव संगम है। पिछले 38 वर्षों से यह मेला भारतीय लोक कला, संस्कृति और शिल्प परंपराओं को न केवल संरक्षित कर रहा है, बल्कि उन्हें नई पीढ़ी और वैश्विक मंच से भी जोड़ रहा है। उन्होंने कहा कि इस वर्ष की थीम ‘लोकल टू ग्लोबल’ और ‘आत्मनिर्भर भारत की पहचान’ माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस विज़न को साकार करती है, जिसके तहत देश के हर कोने में बसे हुनरमंद कारीगर के हाथों को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच मिल सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि आत्मनिर्भरता केवल आर्थिक स्वावलंबन तक सीमित नहीं, बल्कि अपनी संस्कृति पर गर्व, अपनी विरासत का संरक्षण और उसे विश्व के समक्ष आत्मविश्वास के साथ प्रस्तुत करने का संकल्प है। सूरजकुण्ड शिल्प मेला इसी आत्मनिर्भरता का जीवंत और प्रेरक प्रतीक है।

मुख्यमंत्री ने कहा, सहयोग और समागम से समृद्ध होती हैं सभ्यताएं

मुख्यमंत्री ने कहा कि सभ्यताएं समागम और सहयोग से ही समृद्ध होती हैं। इसलिए, इस दिशा में दुनिया के दूसरे सभी देशों की भागीदारी बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि इस बार सूरजकुण्ड शिल्प मेला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और अधिक समृद्ध हो रहा है, जिसमें सहयोगी देश के रूप में हमारे मित्र राष्ट्र मिस्र की विशेष भागीदारी रहेगी। उन्होंने कहा कि मिस्र विश्व की प्राचीनतम और गौरवशाली सभ्यताओं में से एक है, जोकि आधुनिकता के साथ साथ अपनी समृद्ध ऐतिहासिक विरासत के साथ-साथ अफ्रीका और मध्य पूर्व के बीच एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक, राजनीतिक और आर्थिक सेतु की भूमिका निभा रहा है।

इसके साथ ही भागीदार राज्यों के रूप में उत्तर प्रदेश और मेघालय की सहभागिता मेले की विविधता को और विस्तार देगी। उत्तर प्रदेश की गंगा-जमुनी तहजीब, समृद्ध सांस्कृतिक परंपराएं तथा मेघालय की अनोखी मातृसत्तात्मक संस्कृति और जनजातीय विरासत इस मेले को रंगों, परंपराओं और संस्कृतियों का जीवंत उत्सव बनाएंगी। यह सांस्कृतिक सहभागिता ही वह सेतु है, जो राज्यों और देशों के बीच दूरियों को मिटाकर आपसी सौहार्द और एकता को सुदृढ़ करती है।

लोकल को ग्लोबल बनाकर आत्मनिर्भर भारत को दें नई पहचान : नायब सिंह सैनी

मुख्यमंत्री ने कहा कि शिल्प मेले कलाकारों और कारीगरों की प्रतिभा को निखारने के साथ-साथ उन्हें अपने उत्पाद सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंचाने का अवसर देते हैं, जिससे पर्यटन को भी बढ़ावा मिलता है। उन्होंने शिल्पकारों से आह्वान किया कि वे अपनी कला को और अधिक प्रभावशाली बनाने के लिए आधुनिक तकनीक का भी प्रयोग करें। आज तकनीक के माध्यम से दूर-दराज़ में बैठा शिल्पी भी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए अपने उत्पादों को दुनिया के किसी भी कोने तक पहुंचा सकता है। मुख्यमंत्री ने आह्वान किया कि हम सब मिलकर ‘लोकल को ग्लोबल’ बनाएं और ‘आत्मनिर्भर भारत’ की पहचान को और अधिक सशक्त करें।

अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सूरजकुंड शिल्प मेले के प्रति बढ़ रहा विश्वास : अरविंद शर्मा

उद्घाटन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए हरियाणा के विरासत एवं पर्यटन मंत्री डॉ अरविंद शर्मा ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सूरजकुंड शिल्प मेले के प्रति विश्वास लगातार बढ़ रहा है, जिसका प्रमाण मेले में बढ़ती वैश्विक भागीदारी है। उन्होंने कहा कि पिछली बार आयोजित 38वें सूरजकुंड क्राफ्ट मेले में जहां लगभग 44 देशों ने मेले में भाग लिया था, वहीं इस वर्ष 50 से अधिक देशों के लगभग 700 प्रतिनिधि और प्रतिभागी सूरजकुंड शिल्प मेले में शामिल हो रहे हैं, जो इस आयोजन के प्रति अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते भरोसे को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि यह मेला शिल्पकारों, कलाकारों और हस्तशिल्प से जुड़े लोगों के लिए एक सशक्त मंच है, जहां उन्हें बेहतर राजस्व के साथ-साथ अंतर्राष्ट्रीय पहचान भी मिलती है। मेले के सफल आयोजन के लिए सुरक्षा, परिवहन और अन्य सभी व्यवस्थाएं पुख्ता की गई हैं, साथ ही दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन को आयोजन का को-पार्टनर बनाया गया है, ताकि आगंतुकों और पर्यटकों को किसी प्रकार की असुविधा न हो। डॉ. शर्मा ने विश्वास व्यक्त किया कि ‘लोकल टू ग्लोबल’ की भावना के साथ सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय आत्मनिर्भर शिल्प महोत्सव आने वाले वर्षों में और अधिक विस्तार पाएगा।

डॉ शर्मा ने उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन को अवगत कराया कि हरियाणा की ऐतिहासिक और पुरातात्विक धरोहरें अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर विशेष महत्व रखती हैं। उन्होंने विशेष रूप से राखीगढ़ी का उल्लेख करते हुए बताया कि यह लगभग 7000 वर्ष पुरानी विश्व की प्राचीनतम सभ्यताओं में से एक है। उन्होंने कहा कि आज की आधुनिक सभ्यता में जिन व्यवस्थाओं को हम विकास का प्रतीक मानते हैं, उनकी जड़ें राखीगढ़ी जैसी उन्नत सभ्यताओं में मिलती हैं।

जल निकासी व्यवस्था, स्वच्छता की सुदृढ़ प्रणाली, पहिए (व्हील) की अवधारणा तथा सामुदायिक संरचनाओं की योजना जैसे अनेक महत्वपूर्ण सिद्धांत इसी सभ्यता से विकसित हुए। डॉ. शर्मा ने कहा कि राखीगढ़ी न केवल हरियाणा बल्कि पूरे भारत की गौरवशाली विरासत का प्रतीक है और मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में इसे वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर प्रमुख स्थान दिलाने के लिए राज्य सरकार निरंतर प्रयास कर रही है।

यह रहे मौजूद: इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री कृष्ण पाल गुर्जर , टीम हरियाणा के मंत्री डॉ अरविंद शर्मा , मंत्री विपुल गोयल , राज्य मंत्री राजेश नागर , खेल राज्य मंत्री गौरव गौतम , फरीदाबाद मेयर प्रवीण जोशी , बड़खल विधायक धनेश अदलखा , विधायक सतीश फागना , सोहना विधायक तेजपाल तंवर , बल्लभगढ़ विधायक मूलचंद शर्मा , नलवा विधायक रणधीर पनिहार एवं राई विधायिका कृष्णा गहलावत उपस्थित रहे।

Sunil Chauhan

सुनील चौहान हरियाणा के रेवाड़ी और धारूहेड़ा क्षेत्र की खबरों को कवर करते हैं। उन्हें पत्रकारिता में 10 साल का अनुभव है और वे सामाजिक, प्रशासनिक और स्थानीय मुद्दों पर रिपोर्टिंग करते हैं।

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