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CU Haryana के वैज्ञानिकों ने किया बड़ा काम, ‘Soil Health Plus’ से खराब मौसम में भी फसल होगी सुरक्षित और स्वस्थ

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CU Haryana के वैज्ञानिकों ने किया बड़ा काम, 'Soil Health Plus' से खराब मौसम में भी फसल होगी सुरक्षित और स्वस्थ
CU Haryana के वैज्ञानिकों ने किया बड़ा काम, 'Soil Health Plus' से खराब मौसम में भी फसल होगी सुरक्षित और स्वस्थ

CU Haryana: महेंद्रगढ़ स्थित सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ हरियाणा के वैज्ञानिकों ने एक महत्वपूर्ण शोध में “Soil Health Plus” नामक बायोप्रोडक्ट सीरीज विकसित की है। यह बायोप्रोडक्ट फसल की वृद्धि में मदद करेगा और खराब परिस्थितियों में भी पौधों को स्वस्थ बनाए रखेगा। इसके अलावा, यह मिट्टी की उर्वरता और स्वास्थ्य को भी बढ़ाने में सहायक होगा। वैज्ञानिकों का मानना है कि इस प्रकार के बायोप्रोडक्ट से किसानों को प्राकृतिक और टिकाऊ कृषि के लिए एक नया विकल्प मिलेगा।

विश्वविद्यालय की उपलब्धि पर खुशखबरी

इस उपलब्धि पर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. टंकेश्वर कुमार ने शोध टीम को बधाई दी और कहा कि यह सफलता विश्वविद्यालय की बायोटेक्नोलॉजी में बढ़ती नेतृत्व क्षमता और राष्ट्रीय खाद्य एवं पर्यावरण सुरक्षा के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है। कुलपति ने यह भी कहा कि इस तरह के शोध न केवल विज्ञान और कृषि क्षेत्र में योगदान देते हैं, बल्कि यह देश के किसानों के लिए नई संभावनाओं के द्वार भी खोलते हैं।

परियोजना का विवरण और नेतृत्व

यह परियोजना BioRAC-PACE अनुदान (₹40 लाख) के तहत संचालित की जा रही है। इस परियोजना का नेतृत्व प्रोफेसर रूपेश देशमुख, बायोटेक्नोलॉजी विभागाध्यक्ष, और डॉ. हुमाइरा सोन्हा कर रही हैं। टीम ऐसे बायोप्रोडक्ट विकसित कर रही है जो सूखा, खारापन और अन्य प्रतिकूल परिस्थितियों से फसलों की सुरक्षा करते हैं। इसके साथ ही, यह मिट्टी की उर्वरता और फसल उत्पादन को भी बेहतर बनाने में मदद करेगा।

सतत और जैविक कृषि की दिशा में कदम

शोध टीम का यह प्रयास सतत और ऑर्गेनिक कृषि को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। वैज्ञानिकों का कहना है कि Soil Health Plus के उपयोग से किसान कम पानी और सीमित संसाधनों में भी अच्छी पैदावार प्राप्त कर सकते हैं। इसके अलावा, यह उत्पाद मिट्टी की प्राकृतिक गुणवत्ता बनाए रखते हुए फसलों को आवश्यक पोषण प्रदान करता है। इस तरह, विश्वविद्यालय का यह शोध न केवल वैज्ञानिक दृष्टि से बल्कि किसानों और पर्यावरण के लिए भी लाभकारी साबित होगा।