Monsoon 2025: भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार दक्षिण-पश्चिम मानसून बंगाल की खाड़ी, अंडमान सागर और निकोबार द्वीप समूह के कई हिस्सों में प्रगति कर रहा है. बीते दो दिनों में निकोबार में मध्यम से भारी बारिश हुई है. जिससे स्पष्ट संकेत मिल रहे हैं कि मानसून की गतिविधियां तेज हो चुकी हैं.Monsoon 2025
मानसून के लिए बन रही हैं अनुकूल परिस्थितियां
मौसम विभाग का कहना है कि इस समय वायुमंडलीय परिस्थितियां मानसून के लिए बेहद अनुकूल बन चुकी हैं. अगले 3-4 दिनों में मानसून दक्षिण अरब सागर, मालदीव, कोमोरिन क्षेत्र, दक्षिण बंगाल की खाड़ी और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह के बाकी हिस्सों में पहुंच सकता है. इन क्षेत्रों में पश्चिमी हवाओं की गति बढ़ रही है और बादल छाने की स्थिति बनने लगी है, जो मानसून की शुरुआत के संकेत हैं. Monsoon 2025
27 मई को केरल में मानसून की संभावित एंट्री
मौसम विभाग के अनुमान के अनुसार, इस बार मानसून 1 जून से पहले ही भारत में दस्तक दे सकता है.
27 मई को केरल में मानसून के पहुंचने की संभावना जताई गई है.
यदि यह पूर्वानुमान सटीक रहता है, तो यह 2009 के बाद पहली बार होगा जब मानसून समय से पहले भारत पहुंचेगा.
2009 में मानसून 23 मई को केरल पहुंचा था.
मानसून की सामान्य अवधि और विस्तार
IMD के अनुसार,
सामान्यतः 1 जून को मानसून केरल पहुंचता है.
8 जुलाई तक यह पूरा देश कवर कर लेता है.
इसके बाद यह 17 सितंबर से उत्तर-पश्चिम भारत से लौटना शुरू करता है और
15 अक्टूबर तक पूरी तरह विदा हो जाता है.
अल नीनो का असर नहीं, बारिश होगी सामान्य से अधिक
मौसम विभाग ने इस बार अल नीनो की आशंका को नकार दिया है. अप्रैल में ही IMD ने बताया था कि 2025 के मानसून सीजन में सामान्य से अधिक वर्षा हो सकती है. इससे कृषि उत्पादन में सुधार और किसानों के लिए राहत की उम्मीद की जा रही है.
क्या होता है अल नीनो और इसका असर?
अल नीनो एक प्राकृतिक जलवायु घटना है जो पूर्वी प्रशांत महासागर में समुद्र के तापमान के सामान्य से अधिक गर्म होने के कारण होती है. Monsoon 2025
कृषि उत्पादन और जल आपूर्ति पर इसका सीधा असर पड़ता है.
इससे वायुमंडल गर्म होता है और तूफानों की गतिविधियां बढ़ जाती हैं.
भारत में इसका असर कम बारिश और सूखे के रूप में दिखता है.Monsoon 2025
















