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Breaking News: भारत में हिंदू नव वर्ष परंपरागत पंचांग के अनुसार चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को मनाया जाता है। वर्ष 2026 में इस बार 19 मार्च को नव संवत्सर के रूप में मनाया गया था। क्योंकि इस दिन से विक्रम संवत 2083 की शुरुआत होती है, जो हिंदू कैलेंडर का महत्वपूर्ण आधार माना गया है।

हिंदू नव वर्ष भारत की पारंपरिक पंचांग प्रणाली के अनुसार मनाया जाता है, और इसकी तिथि हर साल बदलती रहती है। सामान्यतः यह चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को आता है, जो मार्च-अप्रैल के बीच पड़ती है। इस दिन से ही विक्रम संवत का नया वर्ष शुरू होता है।

जानिए  इसकी महत्ता

उत्तर भारत में इसे “नव संवत्सर” या “चैत्र नवरात्रि का पहला दिन” माना जाता है।
महाराष्ट्र में इसे गुड़ी पड़वा,
आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में उगादी,
और कश्मीर में “नवरेह” के रूप में मनाया जाता है।

इसके पीछे का इतिहास और मान्यता

हिंदू नव वर्ष के पीछे कई धार्मिक और ऐतिहासिक मान्यताएं

  • मान्यता है कि इसी दिन ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना शुरू की थी। इसलिए इसे सृष्टि का पहला दिन माना जाता है।
  • कहा जाता है कि उज्जैन के राजा महाराजा विक्रमादित्य ने शकों पर विजय के बाद विक्रम संवत की स्थापना की थी, जो आज भी हिंदू कैलेंडर का आधार है।
  • इस समय बसंत ऋतु होती है, पेड़ों पर नए पत्ते आते हैं और फसल कटाई का समय होता है। इसलिए इसे प्रकृति के नए चक्र की शुरुआत भी माना जाता है।
  • इसी दिन से चैत्र नवरात्रि शुरू होती है, जिसमें देवी दुर्गा की पूजा की जाती है। इसे शुभ और नए कार्य शुरू करने के लिए अच्छा दिन माना जाता है।

हिंदू नव वर्ष केवल कैलेंडर बदलने का दिन नहीं: बता दे कि हिंदू नव वर्ष केवल कैलेंडर बदलने का दिन नहीं है, बल्कि यह धार्मिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक दृष्टि से “नए आरंभ” का प्रतीक है। भारत के अलग-अलग हिस्सों में इसे अलग नामों और परंपराओं के साथ मनाया जाता है, लेकिन इसका मूल भाव एक ही है—नए साल का स्वागत और शुभ शुरुआत।

 

 

हिंदू नव वर्ष के पीछे धार्मिक और ऐतिहासिक मान्यताएं जुड़ी हुई हैं। मान्यता है कि इस दिन ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना प्रारंभ की थी, इसलिए इसे सृष्टि का पहला दिन माना जाता है। इसके अलावा, उज्जैन के राजा महाराजा विक्रमादित्य द्वारा शकों पर विजय के बाद विक्रम संवत की स्थापना भी इसी कालखंड से जोड़ी जाती है। यही कारण है कि यह दिन भारतीय संस्कृति में नए युग की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है।

धार्मिक दृष्टि से भी यह दिन अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसी तिथि से चैत्र नवरात्रि की शुरुआत होती है। इस दौरान श्रद्धालु देवी दुर्गा की पूजा-अर्चना कर नौ दिनों तक व्रत रखते हैं। साथ ही, यह समय बसंत ऋतु का होता है, जब प्रकृति में नवजीवन दिखाई देता है और फसल कटाई का दौर शुरू होता है। इस कारण हिंदू नव वर्ष को नए उत्साह, ऊर्जा और सकारात्मकता के साथ जोड़ा जाता है।

By Sunil Chauhan

सुनील चौहान हरियाणा के रेवाड़ी और धारूहेड़ा क्षेत्र की खबरों को कवर करते हैं। उन्हें पत्रकारिता में 10 वर्षों का अनुभव है वर्तमान में वे Best24News के साथ जुड़े हुए हैं ताजा और विश्वसनीय खबरें प्रकाशित कर रहे हैं।

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