Haryana News: पेंशन बहाली संघर्ष समिति को मंजूर नहीं UPS: डॉ अरविन्द यादव

On: June 29, 2025 1:22 PM
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पेंशन बहाली संघर्ष समिति को मंजूर नहीं UPS: डॉ अरविन्द यादव

Haryana News: हरियाणा सरकार द्वारा केंद्र सरकार की तर्ज पर आगामी 1 अगस्त 2025 से लागू की जा रही एकीकृत पेंशन योजना (UPS) के विरोध में राज्य भर के कर्मचारियों में जबरदस्त आक्रोश है। कर्मचारियों का कहना है कि यह योजना न केवल मौजूदा एनपीएस (नई पेंशन योजना) से अधिक खतरनाक है, बल्कि यह उनके भविष्य के साथ एक गंभीर खिलवाड़ है। पेंशन बहाली संघर्ष समिति ने इस योजना को अस्वीकार्य बताते हुए आंदोलन तेज करने का ऐलान किया है।

पेंशन बहाली संघर्ष समिति, जिला रेवाड़ी के प्रभारी डॉ. अरविन्द यादव ने कहा कि सरकार ने बिना कर्मचारियों की राय लिए UPS लागू करने का फैसला लिया, जो पूरी तरह से तानाशाही है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह योजना सरकार के लिए लाभकारी हो सकती है, लेकिन कर्मचारियों के लिए यह पूरी तरह से नुकसानदेह है।Haryana News

डॉ. यादव ने यह भी कहा कि यदि यह योजना इतनी ही लाभकारी है, तो सरकार इसे अपने मंत्रियों और अधिकारियों पर क्यों नहीं लागू करती। उन्होंने UPS को एक “पेआउट स्कीम” बताया, जिसमें कर्मचारी की ओर से एकमुश्त राशि जमा करने के बाद लाभ दिया जाता है, जो कि पुरानी पेंशन की गारंटी प्रणाली के विपरीत है।

उन्होंने यह भी बताया कि केंद्र सरकार ने अपने कर्मचारियों को UPS चुनने का विकल्प तो दिया, लेकिन सिर्फ 1 से 2 प्रतिशत कर्मचारियों ने ही इसे स्वीकार किया, जो इस योजना की अस्वीकृति का प्रमाण है। इसके उलट, हरियाणा सरकार कर्मचारियों पर यह योजना थोप रही है और एक बार UPS चुनने के बाद कर्मचारियों को कोई दूसरा विकल्प नहीं दिया जाएगा। डॉ. यादव ने दोहराया कि जब तक पुरानी पेंशन योजना बहाल नहीं की जाती, तब तक संघर्ष जारी रहेगा।

इस मुद्दे पर जिला प्रधान राजबीर यादव ने बताया कि पेंशन बहाली संघर्ष समिति के राज्य प्रधान विजेन्द्र धारीवाल ने 1 अगस्त को पूरे हरियाणा में काला दिवस मनाने का आह्वान किया है। इस दिन सभी कर्मचारी और अधिकारी काली पट्टी बांधकर कार्य करेंगे और शाम 4 बजे जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन किया जाएगा। समिति ने साफ किया है कि पुरानी पेंशन योजना की बहाली तक यह आंदोलन रुकने वाला नहीं है।

Sunil Chauhan

सुनील चौहान हरियाणा के रेवाड़ी और धारूहेड़ा क्षेत्र की खबरों को कवर करते हैं। उन्हें पत्रकारिता में 10 साल का अनुभव है और वे सामाजिक, प्रशासनिक और स्थानीय मुद्दों पर रिपोर्टिंग करते हैं।

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