Teej Festival: हरियाणा इस बार तीज के रंग में रंगा, तो हर गली, हर छत और हर चेहरा उत्सव की खुशी से चमक उठा। आसमान भी रंग-बिरंगी पतंगों और चमकती आतिशबाजी से झिलमिला उठा। चारों ओर डीजे धुन पर महिलाएं झूमती दिखाइ दी। देर रात का ग्रुपों में कार्यक्रम आयाजित किए गए।
इस बार रेवाड़ी यह नज़ारा किसी दीवाली से कम नहीं था। सुबह होते ही बच्चों से लेकर युवाओं और बड़ों तक सभी अपने-अपने घरों की छतों पर डीजे की धुनों पर झूमते, गाते और पतंगबाजी का लुत्फ उठाते नजर आए। Teej Festival

पंतगो स अट आसमान: तीर्ज पर्व पर अब शहरों झूलने की पींग तो गायब हो चुकी है। लेकिन पंतगो से पूराआसमान चमक रहा था। एक के बाद एक “वो काटा”, “ये मारा” की आवाजें पूरे दिन गूंजती रहीं। दिन चढ़ने के साथ पतंगों का कारवां बढ़ता गया और शहर में रंग बिरंगे पतंगो फिजा भरती चली गई।
दोपहर की तपिश भी छतों पर पतंगबाजी के जोश को कम नहीं कर सकी। शाम होते-होते जब हवा में ठंडक घुली तो पतंगों के साथ-साथ लोगों का उत्साह भी चरम पर पहुंच गया। चारों ओर जश्न का माहौल था।जैसे ही संध्या समय जैसे ही सूरज ने विदाई ली, पतंगबाजी का उत्सव आतिशबाजी में बदल गया। डीज की धुन ओर तेज हो गई।Teej Festival
गांवो में झूले बने शान: गांवों में तीज का पारंपरिक स्वरूप भी नजर आया। महिलाओं ने झूले झूलकर सावन के मंगल गीत गाए। उनकी साज-सज्जा, मेहंदी रचे हाथ, पारंपरिक परिधान और उल्लासित चेहरे, इस बात के गवाह बने कि तीज केवल उत्सव नहीं, एक परंपरा है — जो पीढ़ियों से चली आ रही है।
बाजारों में पतंगों, मांझे और मिठाइयों की दुकानों पर रौनक चरम पर रही। पूरे जिले में तीज की धूम देखने को मिली। हर ओर उल्लास, उत्सव और उमंग का ऐसा संगम था, मानो सावन खुद गलियों में झूला झूलने उतर आया हो।

शहर में चारों ओर प्रतिबंधित चाइनीज मांझा धड़ल्ले से बिक रहा है। जिसमें पुलिस लाचार और बेबस दिख रही है और अभियान भी सुस्त दिख रहा है। जबकि आसमान में उड़ती पतंग की डोर कोई और नही बल्कि चाइनीज मांझा ही है।
शहरवासियों कहना है कि अगर पुलिस बेचने वाले और उसका मांझा पकड़ ली है तो फिर आसमान में उड़ती पतंग की डोर चाइनीज मांझा कैसे है। अब तो पुलिस को बेचने वाले और खरीदने वाले दोनों पर कार्रवाई सुनिश्चित करें ताकि डर का माहौल बने और परिजन अपने बच्चों को लेने से मना करें

















