Rewari news: रेवाड़ी। जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में अब बेटियों को लेकर सोच में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है। पहले जिन गांवों में घटते लिंगानुपात को लेकर सवाल उठते थे, वहीं अब वे गांव मिसाल बनकर उभर रहे हैं।
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार फरवरी 2026 में जिले का लिंगानुपात 918 तक पहुंच गया है, जो जनवरी में 874 था। यह सुधार सरकार की योजनाओं, जागरूकता अभियानों और समाज की बदलती मानसिकता का परिणाम माना जा रहा है।

नवरात्र के दौरान बेटियों को देवी स्वरूप मानकर सम्मान देने की परंपरा के साथ अब आम दिनों में भी बेटियों के जन्म पर खुशी मनाने का चलन बढ़ा है। पहले जहां बेटी के जन्म पर सन्नाटा रहता था, वहीं अब परिवारों में उत्सव जैसा माहौल देखने को मिल रहा है। स्वास्थ्य विभाग की टीमों द्वारा लगातार गांवों में जाकर लोगों को जागरूक किया जा रहा है और जिन क्षेत्रों में लिंगानुपात कमजोर है, वहां विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं।
इस प्रयास में आशा और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की भी अहम भूमिका है।
जिले के कई गांवों में लिंगानुपात में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है, जो यह दर्शाता है कि समाज में बेटियों के प्रति सम्मान और स्वीकार्यता बढ़ रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक सोच में स्थायी परिवर्तन का संकेत है। यदि इसी तरह जागरूकता और प्रयास जारी रहे, तो आने वाले समय में जिले में लिंग संतुलन पूरी तरह से बेहतर हो सकता है।
















