Best24news, Haryana: जैसे जैसे बाजार में सरसो की आवक तेज हुई है। वैसे ही (Edible Oil price) सरसो तेल की कीमतो मे कमी आने लगी हैं। महंगाई के चलते तेल की कीमते कम होने से आम आदमी को भी राहत मिली है।
विदेशी बाजारो की तेजी का असर तेल की कीमतो पर दिखने लग गया है। इसी के चलते सरसो तेल के साथ साथ सीपीओ, पोमोलीन तेल कीमते भी काफी कम हो गई है।
घरेलू मांग में कमी होने से देश भर में सरसो की कीमत में कमी आई है। वहीं बात की जाए विदेशी बाज़ार की तो तेजी के रुख के कारण दिल्ली तेल-तिलहन बाजार में शनिवार को सोयाबीन तेल तिलहन और पामोलिन तेल की कीमतों में सुधार आया।
सूत्रों की माने तो शिकागो एक्सचेंज में शुक्रवार को तीन फीसदी उछाल देखने को मिला है। इस बात का पॉजिटिव असर सोयाबीन तेल तिलहन की कीमतों पर देखने को मिला। दूसरी तरफ घरेलू बजार की बात की जाए तो गरमी की वजह से सरसों तेल की मांग में कमी आई है लेकिन मूंगफली तेल तिलहन के भाव पुराने स्तर पर बने रहे।
विदेशी बाजारों की तेजी का असर सीपीओ, पामोलीन तेल कीमतों पर दिखा और इनके भाव सुधार के साथ बंद हुए। बिनौला तेल के भाव भी सुधार प्रदर्शित करते हुए बंद हुए।
सोयाबीन डीगम की कीमतों में आई है तेजी
शिकागो एक्सचेंज में तेजी दर्ज की गई।सोयाबीन डिगम की 46 डॉलर प्रति टन की तेजी आई है, जो 350 रुपये प्रति क्विंटल बैठता है। लेकिन घरेलू बजार में मांग की कमी के चलते दाम में केवल 100 -150 रुपए प्रति क्विंटल का उछाल देखने को मिला।सूत्रों के अनुसार शिकागो में तेजी का असर मलेशिया एक्सचेंज में सोमवार को दिखाई देगा।
घरेलू उत्पादन बढ़ाने पर ध्यान दे सरकार
सूत्रों ने बताया कि सरकार को घरेलू उत्पादन बढाने पर अपना ध्यान केंद्रित करना चाहिए।क्योंकि देशी तेल की कीमतें आयातित तेलों की तुलना में 10 से 12 रुपये प्रति किलो कम है। मांग की जा रही है कि जब थोक के भाव में कमी आई है तो इसका असर खुदरा बाज़ार में भी दिखना चाहिए।
















