रेवाड़ी: विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के दिशा-निर्देशों के तहत इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय मीरपुर के हिंदी विभाग में नव प्रवेशित विद्यार्थियों के लिए दीक्षारंभ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ अधिष्ठाता छात्र कल्याण विभाग प्रोफेसर करण सिंह ने मां सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलित कर किया।
इस अवसर पर उन्होंने छात्रों को संबोधित करते हुए नियमित एवं दूरस्थ शिक्षा के बीच अंतर स्पष्ट किया और जीवन में पुस्तकीय ज्ञान के साथ व्यावहारिक अनुभव को भी आवश्यक बताया। उन्होंने कहा कि नैतिक मूल्यों और संस्कारों का पालन कर ही विद्यार्थी श्रेष्ठ नागरिक बन सकते हैं।

विभागाध्यक्ष डॉ. मंजु पुरी ने मुख्य अतिथि का स्वागत करते हुए कहा कि विद्यार्थी जीवन तपस्या का जीवन है, जिसमें आत्मविश्वास, संकल्प और कठिन परिश्रम सफलता की कुंजी है। उन्होंने बताया कि विभाग ने स्नातक और स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों को नई शिक्षा नीति के अनुरूप तैयार किया है, जिसमें प्रशिक्षण कार्यक्रम को जोड़ा गया है ताकि विद्यार्थियों को सीधे-सीधे रोजगार से जोड़ा जा सके।
इस अवसर पर डॉ. अर्चना ने विश्वविद्यालय और विभाग की कार्यप्रणाली से छात्रों को अवगत कराया। एनएसएस समन्वयक डॉ. अनीता और डॉ. संदीप ने राष्ट्रीय सेवा योजना की गतिविधियों पर विस्तार से चर्चा की। कार्यक्रम संयोजक डॉ. जागीर नागर ने कहा कि सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता, असफलताएं हमें और मजबूत बनाने के लिए आती हैं।
धन्यवाद ज्ञापन डॉ. शकुंतला ने किया और कहा कि जीवन का हर अनुभव हमें कुछ न कुछ सिखाता है। कार्यक्रम के बाद छात्रों ने विश्वविद्यालय पुस्तकालय का भ्रमण कर वहां की कार्यप्रणाली को जाना।

















