Rewari: लेह लद्दाख में दो दिन पूर्व ड्यूटी के दौरान हृदय गति रुकने से शहीद हुए सेना के हवलदार सलीम को शनिवार को उनके पैतृक गांव मायण में पूर्ण सैनिक व राजकीय सम्मान के साथ सुपुर्द-ए खाक कर दिया गया। शहादत को मजहब से ऊपर मानते हुए अंतिम विदाई के समय जनसैलाब उमड़ पड़ा।
सेना के जवानों ने सलामी देकर उन्हें अंतिम विदाई दी। सुपुर्द-ए खाक करते समय आसमान ‘भारत माता की जय-शहीद सलीम अमर रहे’ के नारों से गुंजायमान हो गया।
लगभग 42 वर्षीय सलीम भारतीय सेना में हवलदार के पद पर लेह लद्दाख में ड्यूटी पर तैनात थे। दो दिन पहले बर्फीली पहाड़ियों पर ड्यूटी के दौरान हृदय गति रुकने के कारण वह वीरगति को प्रदान हो गए थे। उनकी शहादत का समाचार परिजनों को 6 फरवरी को ही मिल गया था। इसके बाद से ग्रामीण शहीद के पार्थिव शरीर के आने का इंतजार कर रहे थे।
शनिवार को जैसे ही उनका पार्थिव शरीर गांव पहुंचा, बड़ी संख्या में ग्रामीण एकत्रित हो गए। ग्रामीणों ने शहादत को नमन करते हुए जमकर जयकारे लगाए। प्रशासन की ओर से नायब तहसीलदार हरिकिशन व थाना खोल प्रबंधक टीम के साथ मौके पर पहुंचे। भाजपा नेता जीवन राम गर्ग व दूसरे नेताओं ने भी शहीद को श्रद्धांजलि दी। सेना की ओर से मेजर धीरज पांडे के नेतृत्व में सेना की एक टुकड़ी पार्थिव शरीर के साथ गांव पहुंची थी। शहीद को सलामी देने के बाद ससम्मान अंतिम विदाई दी गई।
भाई भी भारतीय सेना में तैनात
शहीद सलीम के भाई शेर खान उर्फ साहिल भी इस समय भारतीय सेना में तैनात हैं। सलीम के परिवार में माता-पिता व पत्नी के साथ-साथ एक लड़की और एक लड़का हैं। दोनों बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं। सलीम को सुपुर्द-ए खाक करते समय धर्म व जाति से ऊपर उठकर बड़ी संख्या में मायण गांव के लोग कब्रिस्तान पहुंचे, जहां सलीम को अंतिम विदाई दी गई।

















