हरियाणा में राज्यसभा की दो सीटों के लिए हो रहे चुनाव ने प्रदेश की राजनीति को एक बार फिर गर्मा दिया है। चुनाव की प्रक्रिया जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे सियासी हलचल भी तेज होती जा रही है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और कांग्रेस दोनों ही दल इस चुनाव को लेकर पूरी तरह सतर्क दिखाई दे रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह चुनाव केवल दो सीटों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके नतीजे प्रदेश की आगामी राजनीतिक रणनीतियों पर भी असर डाल सकते हैं।
भारतीय जनता पार्टी ने इस चुनाव को गंभीरता से लेते हुए गुजरात के डिप्टी सीएम हर्ष सांघवी को हरियाणा में ऑब्जर्वर नियुक्त किया है। भाजपा के इस कदम को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। माना जा रहा है कि पार्टी किसी भी तरह की क्रॉस वोटिंग या राजनीतिक समीकरणों में बदलाव की संभावना को ध्यान में रखते हुए पूरी तैयारी के साथ मैदान में उतरी है। हर्ष सांघवी की नियुक्ति से यह संकेत भी मिल रहा है कि भाजपा इस चुनाव को लेकर किसी प्रकार की ढिलाई नहीं बरतना चाहती।
भाजपा के इस फैसले के बाद कांग्रेस खेमे में भी हलचल बढ़ गई है। पार्टी नेतृत्व लगातार अपने विधायकों के संपर्क में बना हुआ है। सियासी गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई है कि भाजपा चुनाव में कोई बड़ा उलटफेर करने की रणनीति बना सकती है। ऐसे में कांग्रेस भी अपने विधायकों को एकजुट रखने की कोशिश में जुट गई है इसी को देखते हुए सोमवार शाम 6:30 बजे कांग्रेस विधायक दल की बैठक बुलाई गई है। इस बैठक में नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा और हरियाणा मामलों के प्रभारी बीके हरिप्रसाद प्रमुख रूप से शामिल होंगे। बैठक में विधायकों से बातचीत कर स्थिति का आकलन किया जाएगा और आगे की रणनीति तय की जाएगी। बताया जा रहा है कि यदि पार्टी नेतृत्व को किसी तरह की फूट या क्रॉस वोटिंग की आशंका महसूस होती है, तो विधायकों को कुछ समय के लिए किसी सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट करने का फैसला भी लिया जा सकता है।
उधर, राज्यसभा चुनाव की प्रक्रिया के तहत सोमवार दोपहर तीन बजे तक नामांकन वापस लेने का समय निर्धारित किया गया है। इस समय सीमा के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि चुनाव निर्विरोध होगा या फिर मतदान की नौबत आएगी। इस चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार सतीश नांदल भी मैदान में हैं। यदि वे अपना नामांकन वापस नहीं लेते हैं तो 16 मार्च को मतदान कराया जाएगा। फिलहाल चुनावी मैदान में भाजपा की ओर से संजय भाटिया और कांग्रेस की ओर से कर्मवीर बौद्ध उम्मीदवार हैं। दोनों ही दल अपने-अपने उम्मीदवारों की जीत सुनिश्चित करने के लिए पूरी ताकत लगा रहे हैं। विधानसभा में मौजूद विधायकों की संख्या और राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए यह मुकाबला दिलचस्प बन गया है।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि हरियाणा में राज्यसभा चुनाव अक्सर सियासी गणित और रणनीति का खेल बन जाते हैं। ऐसे में किसी भी दल के लिए यह जरूरी हो जाता है कि वह अपने विधायकों को एकजुट रखे और चुनाव के दौरान किसी भी तरह की अप्रत्याशित स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहे।
कुल मिलाकर हरियाणा की दो राज्यसभा सीटों के लिए होने वाला यह चुनाव केवल संसदीय प्रक्रिया नहीं, बल्कि प्रदेश की राजनीति में चल रही अंदरूनी हलचल और शक्ति संतुलन का भी बड़ा संकेत माना जा रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या चुनाव निर्विरोध संपन्न होता है या फिर 16 मार्च को मतदान के जरिए इसका फैसला होगा।
















