GPS Toll System: देश के इस एक्सप्रेसवे पर नही चलेगा Fastag, GPS सिस्टम से औटोमेटिक कतेग टोल

On: May 13, 2025 7:07 PM
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GPS Toll System

 GPS Based Toll: एनसीआर के दिल्‍ली-मेरठ एक्‍सप्रेसवे ने भारत के एक्सप्रेसवे सिस्टम को नई दिशा दे दी है. अब इस रूट पर सफर करने वाले लोगों को टोल प्लाजा पर रुकने की जरूरत नहीं पड़ेगी. इसके लिए ऑटोमेटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है. यानी गाड़ी जैसे ही एंट्री और एग्जिट पॉइंट से गुजरेगी. वहां लगे कैमरे गाड़ी की नंबर प्लेट को स्कैन कर लेंगे और फास्टैग से जुड़ा टोल स्वतः कट जाएगा. GPS Toll System

दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे बना भविष्य का मॉडल

दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे को पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर विकसित किया गया है और इसका ट्रायल पूरी तरह सफल रहा है. सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) इसे एक आदर्श मॉडल के रूप में देश के अन्य एक्सप्रेसवे और हाईवे पर लागू करने की योजना बना रहा है. इस तकनीक से न केवल यात्रा का समय बचेगा. बल्कि यातायात भी सुगम होगा और टोल वसूली की पारदर्शिता भी बढ़ेगी.

ANPR तकनीक कैसे काम करती है?
ANPR यानी ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन एक डिजिटल कैमरा तकनीक है जो चलती गाड़ी की नंबर प्लेट को पहचान लेती है.

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गाड़ी जैसे ही एक्सप्रेसवे के टोल प्वाइंट से गुजरती है. वहां लगे कैमरे नंबर प्लेट की फोटो क्लिक करते हैं.
यह नंबर प्लेट पहले से फास्टैग से लिंक होती है.
जैसे ही नंबर प्लेट कैमरे में कैद होती है. फास्टैग अकाउंट से अपने-आप टोल शुल्क कट जाता है.

यानी अब ड्राइवर को गाड़ी रोकने, खिड़की खोलने या कार्ड दिखाने की जरूरत नहीं. GPS Toll System

परंपरागत टोल सिस्टम की तुलना में क्यों बेहतर है यह तकनीक?
समय की बचत: वाहन रोकने की जरूरत नहीं. जिससे हर गाड़ी का 3-5 मिनट बच सकता है.
ट्रैफिक जाम से राहत: टोल प्लाजा पर लगने वाली भीड़ और लंबी कतारें खत्म होंगी.
कम प्रदूषण: गाड़ियों का स्टार्ट-स्टॉप मूवमेंट कम होने से कार्बन उत्सर्जन भी घटेगा.
पारदर्शिता: टोल शुल्क की पूरी प्रक्रिया डिजिटल होने से धोखाधड़ी की संभावना कम होगी.
जीपीएस आधारित टोल प्रणाली पर रोक
हाल ही में सरकार ने टोल वसूली के लिए जीपीएस आधारित प्रणाली को लागू करने की बात कही थी. लेकिन एक्सपर्ट कमेटी की रिपोर्ट में GPS मॉडल को लेकर कुछ सुरक्षा और तकनीकी दिक्कतें सामने आईं.

जीपीएस सिग्नल में रुकावट आने पर गड़बड़ी की आशंका रहती है.
हैकिंग और डेटा लीक की भी संभावना जताई गई.
इसी कारण फिलहाल GPS आधारित टोल प्रणाली को अस्थायी रूप से रोक दिया गया है और फिलहाल ANPR आधारित सिस्टम को आगे बढ़ाया जा रहा है.

देशभर के एक्सप्रेसवे पर लागू होगी यह नई व्यवस्था
सड़क परिवहन मंत्रालय की योजना है कि दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे की सफलता को देखते हुए देश के अन्य महत्वपूर्ण नेशनल हाईवे और एक्सप्रेसवे पर भी ANPR तकनीक को अपनाया जाए. इसके लिए मंत्रालय की ओर से कुछ क्षेत्रों में टेंडर भी जारी कर दिए गए हैं.

आने वाले समय में मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे, बेंगलुरु-मैसूर एक्सप्रेसवे, लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे जैसे मार्गों पर भी यह प्रणाली लागू की जाएगी.
इससे न केवल यात्रियों को सहूलियत होगी. बल्कि टोल वसूली की स्पीड और पारदर्शिता में भी इजाफा होगा.

तेज गति से तैयार हो रहे तकनीकी टोल प्वाइंट
दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर अब तक 100 से ज्यादा हाई-रेजोल्यूशन कैमरे लगाए जा चुके हैं. इन कैमरों को एंट्री और एग्जिट प्वाइंट पर इस तरह से सेट किया गया है कि वे हर आने-जाने वाले वाहन को आसानी से स्कैन कर सकें.

टोल प्वाइंट पर सेंसर आधारित गेट, AI कैमरा और फास्टैग रीडर को एक साथ जोड़ा गया है.
इन सबका संचालन एक सेंट्रल कंट्रोल सिस्टम से किया जाएगा जो हर गाड़ी का डेटा सुरक्षित रखेगा.
यात्रियों के लिए जरूरी है फास्टैग अपडेटेड रखना
अगर आप दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे या भविष्य में किसी अन्य हाईवे पर सफर करने जा रहे हैं तो ध्यान रखें:

इसलिए जरूरी है कि गाड़ी की नंबर प्लेट और फास्टैग की जानकारी को नेशनल हाईवे अथॉरिटी के पोर्टल पर अपडेट रखें.
आपकी गाड़ी में लगा फास्टैग सक्रिय और बैलेंस से भरा होना चाहिए.
अगर नंबर प्लेट और फास्टैग में कोई मिसमैच पाया गया तो टोल शुल्क नहीं कटेगा और पेनाल्टी लग सकती है. GPS Toll System

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सुनील कुमार पत्रकारिता क्षेत्र में पिछले 8 साल से सक्रिय है। इन्होंने दैनिक जागरण, राजस्थान पत्रिका, हरीभूमि व अमर उजाला में बतौर संवाददाता काम किया है। अब बेस्ट 24 न्यूम में बतौर फाउंडर कार्यरत हूं

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