CORRUPTION: नगरपरिषद रेवाड़ी में भष्ट्राचार कोई नहीं बात नहीं…जानिए पहले के कारनामे

On: February 17, 2026 9:52 AM
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CORRUPTION: नगरपरिषद रेवाड़ी में भष्ट्राचार कोई नहीं बात नहीं है। पिछले रिकोर्ड उठाकर देख लो, हर बार यही खेल होता है। एसीबी की रेड तक डाली गई लेकिन हुआ क्या… सिर्फ जनता को यह दिखया जाता है जांच में कुछ नहीं मिला जबकि रेवाड़ी नपा भ्रष्टाचार में सनी हुई है। एक बार फिर एक नया विवाद शुरू हो गया है। सारा खेल मोटी कमाई का है। चाहे उसे किसी भी रूप में देख ले। इस बार भी असली खिलाडी बच जाएंगे पहले की तरह…

 

रेवाड़ी नगर परिषद में हालिया वर्षों में भ्रष्टाचार और भारी वित्तीय अनियमितताओं के गंभीर आरोप सामने आए हैं, जिसमें विधानसभा की पिटीशन कमेटी ने गोवंशी पकड़ने के टेंडर (₹16 लाख) और बंदर पकड़ने (₹9 लाख) के कार्यों में अनियमितता पाए जाने पर जांच के आदेश दिए हैं।

नगर परिषद के चेयरमैन और पदाधिकारियों पर मिलीभगत के आरोप लगते रहे हैं, और हाल ही में बिना वेतन छुट्टी पर गए जेई को वेतन जारी करने के मामले में कर्मचारियों को निलंबित किया गया है।

  • नगर परिषद रेवाड़ी भ्रष्टाचार के प्रमुख मुद्दे (2025-2026):
    गोवंशी और बंदर पकड़ने में घोटाला: टेंडर के तहत पकड़े गए पशुओं की संख्या और रिकॉर्ड में बड़ी हेराफेरी पाई गई, जिसके बाद पेमेंट रिकवरी और एफआईआर के निर्देश दिए गए।

 

 

  • कर्मचारियों का निलंबन: फरवरी 2026 में, नगर परिषद के JE हैप्पी सैनी और अकाउंटेंट जितेंद्र यादव को बिना वेतन छुट्टी के दौरान सैलरी जारी करने के मामले में सस्पेंड कर दिया गया।
  • ईओ की कार्यप्रणाली पर सवाल: नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी (EO) सुशील कुमार भुक्कल ने डीएमसी (DMC) की कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप लगाए हैं, जिससे प्रशासनिक स्तर पर खींचतान तेज हो गई है।
  • NDC रिश्वत कांड: इससे पहले, NDC (No Dues Certificate) के लिए रिश्वत लेने के मामले में तत्कालीन EO को सस्पेंड किया गया था।

 

  • घटिया निर्माण सामग्री का उपयोग (2025-2026): शहर में नालों और सड़कों के निर्माण में घटिया सामग्री (sub-standard material) इस्तेमाल करने के आरोप लगे हैं। हाल ही में एक 200 मीटर लंबे नाले के निर्माण में तीसरी श्रेणी की सामग्री मिलने पर अधिकारियों ने सख्त कार्रवाई और ठेकेदारों को ब्लैकलिस्ट करने की चेतावनी दी है।
  • प्रॉपर्टी आईडी (Property ID) रिश्वत कांड (2022-2023): 2022 में जिला नगर आयुक्त ने स्टेट विजिलेंस ब्यूरो को पत्र लिखकर प्रॉपर्टी आईडी बनाने में हो रहे भ्रष्टाचार की जांच की मांग की थी। एक पटवारी द्वारा प्रॉपर्टी आईडी बनाने के एवज में 2 लाख रुपये की रिश्वत मांगने का वीडियो सामने आने के बाद केस दर्ज किया गया था। इस मामले में तत्कालीन ईओ अभय यादव को भी निलंबित किया गया था।

 

  • अभय यादव (तत्कालीन EO): 2022-23 में प्रॉपर्टी आईडी (Property ID) रिश्वत कांड के दौरान इन्हें निलंबित किया गया था।
  • सुमित (नगर पालिका सचिव): हाल ही में मंत्री के सामने प्रॉपर्टी आईडी और एनडीसी (NDC) पोर्टल की खामियों और नई आईडी बनाकर धोखाधड़ी करने के मामले में इनसे जवाब मांगा गया है।
वार्ड-वार घोटाले और शिकायतें
विधानसभा की पिटीशन कमेटी और स्थानीय पार्षदों द्वारा उठाए गए कुछ प्रमुख वार्ड-वार मामले इस प्रकार हैं:
  • वार्ड नंबर 4: टाइल रोड निर्माण के लिए 3.63 लाख रुपये का दो बार भुगतान करने और 4 लाख रुपये के फर्जी बिल पास करने का आरोप है।
  • वार्ड नंबर 25: इस वार्ड में भी टाइल रोड के नाम पर 2.5 लाख रुपये के फर्जी बिल जारी किए जाने की शिकायत दर्ज है।
  • वार्ड नंबर 27: यहाँ तीन अलग-अलग विकास कार्यों के लिए 2.47 लाख रुपये का दोहरा भुगतान (Double Payment) किया गया।

 

  • नाला सफाई घोटाला: शहर के बरसाती नालों की सफाई के लिए ठेकेदारों को काम पूरा होने से पहले ही भुगतान कर दिया गया। इस मामले की जांच वर्तमान में डीसी अभिषेक मीणा कर रहे हैं।
  • पशु पकड़ने का घोटाला (2023-24): जाटूसाना गौशाला में पशुओं की मौत के बावजूद ठेकेदार को 16 लाख रुपये का भुगतान किया गया। पिटीशन कमेटी ने इस राशि की रिकवरी और एफआईआर के आदेश दिए हैं।
  • बंदर पकड़ने का टेंडर: 700 बंदर पकड़ने के नाम पर 9.70 लाख रुपये की अदायगी में भी धांधली की आशंका जताई गई है

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पिछले योजना में भ्रष्टाचार का खेल हुआ था। इडी की रेड के बाद गिरफ्तारी भी हुई। कई दिनो बैठके चली ओर फिर चुपचाप मामला शांत हो गया। जिन पर आरोप लगा था वो आराम से नोकरी कर रहे है। शिकायत करते वाले भी जांच होने के बाद शांत हो गए है। लेकिन सच्चाई सामने नहीं आई।CORRUPTION

तुरंत ट्रांसफर आदेश’ बता दे कि सुशील कुमार भुक्कल ने सोमवार शाम करीब साढ़े चार बजे प्रेस वार्ता की थी, जिसमें उन्होंने डीएमसी ब्रह्मप्रकाश पर जातीय आधार पर प्रताड़ित करने का गंभीर आरोप लगाया था। उन्होंने कहा कि एससी समाज में जन्म लेना उनका कोई गुनाह नहीं है, लेकिन इसी कारण उन्हें बार-बार निशाना बनाया जा रहा है। ईओ ने आरोप लगाया कि डीएमसी उन्हें सस्पेंड या टर्मिनेट करवाना चाहते हैं। बस फिर क्या था प्रेस वार्ता के कुछ घंटों बाद ही शाम 7 बजे के बाद सरकार ने उनके ट्रांसफर आदेश जारी कर दिए।

माफी मांग चुके है डीएमसी: ईओ ने यह भी बताया कि दुर्व्यवहार से परेशान होकर जब उन्होंने इस्तीफा देने की सोची, तो डीएमसी ने पहले डीसी ऑफिस और फिर नगर परिषद में आकर उनसे माफी मांगी थी। उन्होंने जेई को वेतन जारी करने की टेक्निकल गलती को मानते हुए कहा कि “इंसान ठोकर खाकर ही समझता है”।

जानिए क्या है विवाद: रेवाड़ी नगर परिषद में अवैतनिक अवकाश पर गए कनिष्ठ अभियंता हैप्पी की सैलरी जारी किए जाने का विवाद तूल बना हुआ है इसी को लेकर अब अकाउंटेंट व जेई के सस्पेंड होने के बाद जारी विवाद थम नहीं रहा है। नप के कार्यकारी अधिकारी सुशील कुमार ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए इस मामले में डीएमसी काे जिम्मेदार ठहराया।

क्यों किया वेतन जारी: इस मामले में कुछ गलतफहमी भी हो गई थी। जेई को वेतन जारी करने को टेक्निकल गलती मानते हुए कहा कि इंसान ठोकर खाकर ही समझता है। जेई ने 18 अगस्त से 18 दिसंबर तक छुट्टी ली थी। 10 अक्टूबर को वापस ड्यूटी ज्वाइन की और फिर छुट्टी पर चला गया। इसके लिए उसे दो माह का वेतन जारी कर दिया गया।

 

Harsh

हर्ष चौहान पिछले तीन साल से पत्रकारिता में कार्यरत हूं। इस साइट के माध्यम से अपराध, मनोरंजन, राजनीति व देश विदेश की खबरे मेरे द्वारा प्रकाशित की जाती है। मै बतौर औथर कार्यरत हूं

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