जी राम जी योजना (VB-G RAM G) को मनरेगा (MGNREGA) की जगह केंद्रीय सरकार ने शुरू किया है। इसके लिए आज सरकार संसद में बिल प्रस्तुत करेगी। इस बिल के तहत हर वित्तीय वर्ष में प्रत्येक ग्रामीण परिवार को 120 दिनों का नियमित रोजगार मिलेगा। बिल प्रस्तुत करते समय संसद में हंगामे की उम्मीद है।
मनरेगा का पूरा नाम महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम है। 2005 में यूपीपी सरकार ने यह अधिनियम भारतीय संसद में पेश किया था। 2009 में इसका मूल नाम MGNREGA बदलकर NREGA हो गया था। 1 अप्रैल 2008 तक देश के सभी जिलों में इसे फैलाया गया जिससे ग्रामीण लोगों को 100 दिन का गारंटी रोजगार मिला।
बिल की एक प्रतिलिपि के अनुसार इसका उद्देश्य संसद में 2005 के महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी अधिनियम को खत्म करना और Viksit Bharat Guarantee for Rozgar and Ajeevika Mission (Gramin) 2025 पेश करना है। बिल का उद्देश्य है कि विकसित भारत 2047 के राष्ट्रीय विज़न के साथ जुड़ा एक ग्रामीण विकास ढांचा बनाया जाए जिसके तहत हर ग्रामीण परिवार के वयस्क सदस्य बिना किसी प्रशिक्षित अनुप्रयोग के कार्य करने को तैयार होंगे।
योजना प्रत्येक वित्तीय वर्ष में 125 दिनों के काम की कानूनी गारंटी देगी। सोमवार को जारी की गई लोकसभा की सप्लीमेंट्री लिस्ट में इस बिल को शामिल किया गया है जो जल्द ही पेश होगा।
बिल पर चर्चा करते हुए ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि MGNREGA ने पिछले दो दशक में ग्रामीण परिवारों को गारंटी वाली नौकरी दी है। लेकिन उन्होंने कहा सामाजिक सुरक्षा उपायों की व्यापक कवरेज और प्रमुख सरकारी योजनाओं के सैचुरेशन ओरिएंटेड इम्प्लीमेंटेशन से ग्रामीण इलाकों में हुए महत्वपूर्ण सामाजिक आर्थिक बदलावों को देखते हुए इसमें और मजबूती लाना जरूरी हो गया है।
मंत्री ने कहा कि जब MGNREGA का ध्यान आजीविका सुरक्षा को बढ़ाने पर था तो नया बिल कहता है कि समृद्ध और मज़बूत ग्रामीण भारत के लिए सशक्तिकरण विकास तालमेल और सैचुरेशन को बढ़ावा देना है यह सार्वजनिक कार्यों के माध्यम से सशक्तिकरण विकास तालमेल और सैचुरेशन पर जोर देता है जो मिलकर विकसित भारत को राष्ट्रीय रूरल इंफ्रास्ट्रक्चर बनाते हैं
















