हरियाणा : हरियाणा भाजपा में अब दूसरे दलों के नेताओं या पार्टी छोड़कर गए पुराने नेताओं की वापसी आसान नहीं होगी। पार्टी ने स्पष्ट कर दिया है कि भाजपा में शामिल होने के इच्छुक नेताओं को पहले स्क्रीनिंग प्रक्रिया से गुजरना होगा। इसके लिए प्रदेश और जिला स्तर पर ज्वाइनिंग कमेटियों का गठन किया गया है। किसी भी नेता की एंट्री से पहले जिला कमेटी प्रारंभिक जांच करेगी और इसके बाद मामला प्रदेश स्तर पर भेजा जाएगा।
तीसरी बार पूर्ण बहुमत की सरकार : 2024 के विधानसभा चुनावों में नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में भाजपा ने 48 सीटों के साथ लगातार तीसरी बार पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई थी। इससे पहले लोकसभा चुनावों में भाजपा और कांग्रेस ने राज्य की 10-10 सीटों में से पांच-पांच सीटें जीती थीं, जिससे उस समय कांग्रेस के पक्ष में माहौल बनता दिख रहा था। इसी दौरान भाजपा की दस साल की सरकार के खिलाफ एंटी इनकंबेंसी की चर्चा भी तेज थी। ऐसे हालात में कई नेता भाजपा छोड़कर कांग्रेस में चले गए थे, खासकर वे नेता जिनके विधानसभा टिकट कट गए थे।
प्रदेशाध्यक्ष मोहनलाल बड़ौली की स्वीकृति के बाद प्रदेश महामंत्री सुरेंद्र पूनिया ने प्रदेश और जिला ज्वाइनिंग कमेटियों की सूची जारी की है। प्रदेश स्तर पर पूर्व सांसद और भाजपा संसदीय बोर्ड की सदस्य डॉ. सुधा यादव के नेतृत्व में कमेटी गठित की गई है। इस कमेटी में समाज कल्याण मंत्री कृष्ण कुमार बेदी, पूर्व शिक्षा व कृषि मंत्री कंवरपाल गुर्जर और पूर्व शहरी स्थानीय निकाय मंत्री सुभाष सुधा को सदस्य बनाया गया है। भाजपा छोड़ चुके या दूसरे दलों से आने वाले बड़े नेताओं की वापसी पर अंतिम फैसला यही कमेटी करेगी।
इन नेताओं को उम्मीद थी कि कांग्रेस की सरकार बनने पर उन्हें राजनीतिक समायोजन मिल जाएगा, लेकिन विधानसभा चुनावों में भाजपा की प्रचंड जीत के बाद उनकी रणनीति विफल हो गई। अब वही नेता एक बार फिर भाजपा में वापसी की कोशिश कर रहे हैं। इसे देखते हुए पार्टी नेतृत्व ने स्पष्ट नीति अपनाते हुए घर वापसी पर सख्त नियम लागू कर दिए हैं।
ज्वाइनिंग कमेटियों का होगा गठन : हरियाणा में भले ही 23 राजस्व जिले हैं, लेकिन संगठनात्मक रूप से भाजपा ने 27 जिले बनाए हुए हैं। सभी संगठनात्मक जिलों में ज्वाइनिंग कमेटियों का गठन किया गया है। जिला स्तर पर कमेटी का अध्यक्ष जिला प्रभारी होगा, जबकि वर्तमान और पूर्व जिलाध्यक्ष सदस्य रहेंगे। स्थानीय स्तर के कार्यकर्ताओं और छोटे नेताओं की ज्वाइनिंग जिला कमेटी अपने स्तर पर स्क्रीनिंग के बाद कर सकेगी, जबकि बड़े नेताओं के मामलों को प्रदेश कमेटी के पास भेजा जाएगा।
आसान नहीं है एंट्री: बता दे कि कमेटी अपनी रिपोर्ट प्रदेश कमेटी को सौंपेगी। दोनों स्तर की सिफारिशों के बाद ही मुख्यमंत्री और प्रदेशाध्यक्ष की मौजूदगी में किसी नेता की भाजपा में औपचारिक एंट्री कराई जाएगी। पार्टी का साफ संदेश है कि अब अवसरवाद की राजनीति के लिए भाजपा के दरवाजे स्वतः नहीं खुलेंगे।

















