Best24News : हरियाणा के रेवाड़ी जिले की पर्यावरणीय पहचान को नया जीवन देने के लिए एक बड़ा जन-आंदोलन शुरू होने जा रहा है। मसानी बैराज को आधिकारिक तौर पर ‘वेटलैंड’ (आर्द्रभूमि) घोषित कराने के लिए आगामी 5 अप्रैल से एक विशाल सिग्नेचर अभियान (हस्ताक्षर अभियान) चलाया जाएगा।
छिडेगी जंग, इस गांव से शुरू होगा अभियान: बता दे कि धारूहेड़ा में पर्यावरण संरक्षण को लेकर एक अहम पहल शुरू की जा रही है। मसानी बैराज को वेटलेंड घोषित को लेकर जागरूकता अभियान कर पैदल यात्रा निकालकर लोगों को प्रदूषण के प्रति जागरूक किया जाएगा।
प्रवासी पक्षियों का रहा है पहले भी ठिकाना: बता दे कि साल 2012 में जब लाल बहादुर शास्त्री रिचार्ज कैनाल द्वारा यहां साफ पानी छोड़ा गया था, तब यहां जैव विविधता का अद्भुत नजारा देखने को मिला था। उस समय यहां साइबेरियन क्रेन, ग्रेटर फ्लेमिंगो, रफ, तिदार, गुलाबी पेलिकन, ग्रेटर स्पॉटेड ईगल और रेड हेडेड फाल्कन जैसी दुर्लभ प्रजातियां देखी गई थीं। यदि इसे वेटलैंड का दर्जा मिलता है, तो न केवल इन पक्षियों की वापसी होगी, बल्कि यह क्षेत्र इको-टूरिज्म का बड़ा केंद्र भी बनेगा।
क्यों उठ रही है मसानी बैराज को वेटलैंड बनाने की मांग?
बता दे कि ‘राष्ट्रीय प्रकृति पर्यावरण संरक्षण एवं संवर्धन संस्था’ के पदाधिकारियों ने इस संबंध में जिला प्रशासन को ज्ञापन भी सौंपा है। संस्था के संयोजक और पूर्व रेंज अधिकारी कमल सिंह यादव (खेजड़ी बचाओ अभियान के प्रणेता) का कहना है कि, मसानी बैराज वेटलैंड बनने की तमाम शर्तों को पूरा करता है। वर्तमान में हरियाणा में भिंडावास और सुल्तानपुर झील ही रामसर साइट्स (अंतरराष्ट्रीय महत्व के वेटलैंड) के रूप में मान्यता प्राप्त हैं। मसानी बैराज में भी वह क्षमता है कि, इसे उसी तर्ज पर विकसित क्यों नहीं किया।
सुरक्षित पर्यावरण की पहल: संस्था के राष्ट्रीय संयोजक एवं रिटायर्ड वन अधिकारी कमल सिंह यादव के नेतृत्व में यह जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। उन्होंने ग्रामीणों से इस मुहिम में बढ़-चढ़कर भाग लेने की अपील की है, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ और सुरक्षित पर्यावरण सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने कहा अगर आने वाली पीढियों को बचाना है ये अभियान बहुत जरूरी है।
जीतपुरा से शरू होगी यात्रा: बता दे कि इस अभियान की शुरुआत 5 अप्रैल को जीतपूरा गांव से होगी, जहां से अभियान के तहत यात्रा विभिन्न गांवों से होकर गुजरेगी। इस दौरान खलियवास, तितरपुर, मसानी, रलियावास, निंगनियावास, हसनपुर, पंचौर, जडथल, आसियाकी, सांपला, लादुवास, साल्हावास, , खिजूरी, निखरीऔर संगवाड़ी जैसे गांवों में लोगों को पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रेरित किया जाएगा।
इस अभियान का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ते प्रदूषण को कम करना और लोगों को स्वच्छ वातावरण के प्रति जागरूक करना है। राष्ट्रीय प्रकृति पर्यावरण संरक्षण एवं संवर्धन संस्था के तत्वावधान में आयोजित इस यात्रा के दौरान विशेषज्ञ और सामाजिक कार्यकर्ता गांव-गांव जाकर लोगों को पेड़-पौधे लगाने, जल संरक्षण और स्वच्छता बनाए रखने के लिए प्रेरित करेंगे।

















