Haryana news:भारतीय किसान यूनियन चढ़ूनी जिला रेवाड़ी और भारतीय किसान यूनियन टिकैत की संयुक्त बैठक किसान भवन में आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता करते हुए समय सिंह प्रधान ने बताया कि किसान भवन अनाज मंडी रेवाड़ी में स्थित है और इसका उद्देश्य किसानों के लिए आराम, आपसी चर्चा और समस्याओं के समाधान का मंच उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि किसान भवन पर रोजाना लगभग 50 किसान आते हैं, जहां वे अपनी फसलों से जुड़े मुद्दों, मंडी व्यवस्था और प्रशासनिक समस्याओं पर बातचीत करते हैं।
बैठक में किसानों ने आरोप लगाया कि कुछ सरकारी कर्मचारी और अधिकारी किसान भवन पर कब्जा कर वहां अपना दफ्तर खोलने की कोशिश कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि अधिकारियों का व्यवहार भी ठीक नहीं है, जिससे किसानों में रोष है। यूनियन नेताओं ने स्पष्ट किया कि किसान भवन किसानों की सुविधा के लिए बनाया गया है, न कि प्रशासनिक कार्यालय के रूप में उपयोग के लिए।
यदि किसान भवन पर कब्जा किया गया तो फसल बेचने के लिए मंडी में आने वाले किसान न तो आराम कर पाएंगे और न ही आपस में विचार-विमर्श कर सकेंगे।
बैठक के बाद भारतीय किसान यूनियन चढ़ूनी और टिकैत के प्रतिनिधियों ने जिला उपायुक्त के नाम बीडीपीओ रेवाड़ी को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में मांग की गई कि संबंधित अधिकारी किसानों से माफी मांगें और किसान भवन को किसानों के लिए ही सुरक्षित रखा जाए। यूनियन पदाधिकारियों ने सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि यदि मांगें नहीं मानी गईं तो किसान भूख हड़ताल पर बैठने को मजबूर होंगे। उन्होंने यह भी कहा कि आवश्यकता पड़ी तो किसान भवन पर ताला लगाकर 24 घंटे का धरना दिया जाएगा और किसी भी टकराव की स्थिति की जिम्मेदारी प्रशासन और सरकार की होगी।
ज्ञापन के दौरान अधिकारियों की ओर से यह आश्वासन दिया गया कि किसानों की मांगों को उच्च अधिकारियों तक भेजा जाएगा और समाधान निकाला जाएगा। अधिकारियों ने यह भी कहा कि किसान भवन किसानों के उपयोग के लिए ही रहेगा। इस आश्वासन के बाद किसानों ने फिलहाल आंदोलन को स्थगित रखा, लेकिन भविष्य में ठोस कार्रवाई न होने पर आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी।
इस मौके पर राजेंद्र कुमार गेरा, भारतीय किसान यूनियन टिकैत की ओर से भजनलाल और खुबा राम, एडवोकेट सविता दहिया, मुन्नी बूढ़पुर, मनीषा यादव बोडिया कमालपुर, ममता यादव, राजकुमार, अशोक कुमार, ओपी लोहाणा, रोशन लाल दरोगा, शीशराम साहब, बाबूलाल रोडवेज, वेद डाडरा, राज सिंह ढिल्लो, जगदीश गुर्जर सहित बड़ी संख्या में किसान नेता और किसान मौजूद रहे।

















