Haryana News: एक ओर जहाँ 1 जनवरी 2006 के बाद हरियाणा सरकार की सेवा में नियुक्त नियमित कर्मचारियों के लिए ओल्ड पेंशन स्कीम ( ओ.पी.एस.) अर्थात पूर्णतया सरकारी खजाने से पेंशन मिलने के स्थान पर नई पेंशन योजना (एन.पी.एस.) लागू कर दी गई थी जिसमें हर सरकारी कर्मी को प्रतिमाह अपने मूल वेतन का 10 प्रतिशत कटवाना पड़ता है एवं अब ताज़ा तौर पर हालांकि केंद्र सरकार की तर्ज पर हरियाणा में भी एन.पी.एस. का संशोधित रूप अर्थात यूनिफाइड पेंशन स्कीम (यू.पी.एस.) का विकल्प चुनने का प्रदेश के सरकारी कर्मियों को विकल्प दिया गया है, वहीं दूसरी ओर हरियाणा के पूर्व विधायकों पर हालांकि प्रदेश की नायब सैनी सरकार पूर्णतया मेहरबान है.
गत माह 26 जून को हरियाणा कैबिनेट की सम्पन्न हुई बैठक में लिए गए अनेक फैसलों में एक निर्णय प्रदेश विधानसभा के हर पूर्व सदस्य अर्थात विधायक को स्पेशल ट्रेवलिंग अलाउंस (विशेष यात्रा भत्ता) देने से सम्बंधित भी है जिससे राज्य के अनेकों पूर्व विधायकों की पेंशन राशि में बढ़ोतरी होगी विशेषकर जिनकी मौजूदा पेंशन राशि प्रतिमाह एक लाख रुपये से अधिक है.
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के एडवोकेट और विधायी मामलों के जानकार हेमंत कुमार ने बताया कि हरियाणा मंत्रिपरिषद की पिछली बैठक में हरियाणा विधानसभा (सदस्यों का वेतन, भत्ते एवं पेंशन) कानून, 1975 की धारा 7(सी) में संशोधन को मंजूरी प्रदान की गई जिसमें प्रदेश के पूर्व विधायकों को प्रतिमाह विशेष यात्रा भत्ता प्राप्त प्राप्त करने लिए अधिकतम एक लाख रुपये तक पेंशन राशि की सीमा को हटा दिया गया है जिसके फलस्वरूप अब प्रतिमाह एक लाख रुपये से ऊपर पेंशन प्राप्त कर रहे पूर्व विधायकों को भी हर महीने दस हज़ार रुपये स्पेशल ट्रेवलिंग अलाउंस (एस.टी.ए.) के तौर पर प्राप्त होंगे.
आगामी अगस्त-सितम्बर माह में निर्धारित हरियाणा विधानसभा के मानसून सत्र में उपरोक्त कानूनी संशोधन को सदन में विधेयक के तौर पर पेश कर पास करा लिया जाएगा. हालांकि अगर नायब सैनी सरकार चाहे, तो वह उससे पूर्व भी उक्त कानूनी संशोधन को राज्यपाल से अध्यादेश के तौर पर प्रख्यापित कराकर तत्काल भी लागू कर सकती है.
बहरहाल, हरियाणा में पूर्व विधायकों की पेंशन बारे व्याप्त कानूनी प्रावधानों बारे जानकारी देते हुए हेमंत ने बताया कि आज से छ; वर्ष पूर्व 2018 में हरियाणा विधानसभा द्वारा वर्ष 1975 के कानून में संशोधन कर प्रदेश के पूर्व विधायकों को उन्हें मिलने वाली पेंशन-राशि के आधार पर दो श्रेणियों में बांटा गया था, पहले जो 1 जनवरी 2016 से पहले विधायक के तौर पर अपना कार्यकाल पूरा कर चुके थे और दूसरे जो उक्त तारीख के बाद.
1 जनवरी 2016 से पहले के पूर्व विधायकों की पेंशन राशि को ज्यों का त्यों रखा गया हालांकि उसके बाद बने पूर्व विधायकों के लिए व्यवस्था की गई कि उपरोक्त तारीख के बाद जिस विधायक ने एक या एक से अधिक कार्यकाल पूरा किया है और वर्तमान में वह निर्वाचित विधायक नहीं है, उसके एवज में उसे एक कार्यकाल के लिए प्रतिमाह 50 हजार रूपये मूल पेंशन मिलेगी. एक कार्यकाल से अधिक होने पर उसे प्रति अतिरिक्त वर्ष पर दो हजार रुपये की दर से मूल पेंशन राशि में अतिरिक्त वृद्धि की व्यवस्था भी की गई.
यही नहीं उपरोक्त 50 हज़ार रुपये की मूल पेंशन राशि अथवा एक कार्यकाल से ऊपर होने पर निर्धारित होने वाली अतिरिक्त पेंशन राशि पर हर माह उस दर से महंगाई राहत — डियरनेस रिलीफ (डी.आर.) मिलता है जिस दर पर हरियाणा सरकार के पेंशनरों को मिलता है. केंद्र सरकार की तर्ज पर हरियाणा में 1 जनवरी 2025 से डी.आर. की दर 55 % है जिससे हरियाणा में हर एक कार्यकाल वाले पूर्व विधायक की पेंशन मौजूदा मासिक 77 हज़ार 500 रूपये है.
यही नहीं पहले अगर किसी विधायक की पेंशन राशि एक लाख रुपये से कम बनती है, तो उसे प्रतिमाह 10 हजार रुपये विशेष यात्रा भत्ता भी मिलता है. हालांकि यह एक लाख रुपये से कम पेंशन ले रहे सभी पूर्व विधायकों ले लिए एक जैसा अर्थात प्रतिमाह दस हज़ार रुपये नहीं हैं बल्कि कानून में ऐसा प्रावधान है कि मूल पेंशन, डी.आर. और एस.टी.ए. तीनो मिलाकर एक लाख रुपये से ऊपर नहीं होना चाहिए.
उदाहरण के लिए हेमंत ने अपने गृह वि.स. हलके अम्बाला शहर से पूर्व भाजपा विधायक असीम गोयल का हवाला देते हुए बताया कि वर्ष 2014 से 2024 तक दो बार विधायक रहे असीम की दो कार्यकाल की पेंशन प्रतिमाह 60 हजार रुपये बनती है, उस पर 55% प्रतिशत की दर से 33 हजार रुपये डी.आर. बनेगा जिससे उनकी कुल पेंशन राशि प्रतिमाह 93 हजार रुपये बनती है.
अब चूँकि यह एक लाख रुपये से कम है, इसलिए उन्हें एस.टी.ए. तो प्राप्त हो रहा है परन्तु यह एक लाख से 93 हजार रुपये कम अर्थात प्रतिमाह 7 हज़ार रुपये मिलता है. बहरहाल, ताज़ा संशोधन के बाद अब असीम गोयल को प्रतिमाह पूरा 10 हज़ार रुपये विशेष यात्रा भत्ता प्राप्त होगा जिससे उनकी मासिक पेंशन मौजूदा एक लाख रुपये से तीन हजार बढ़कर 1 लाख तीन हज़ार रुपये हो जायेगी.
बहरहाल, अब ताज़ा निर्णय के बाद 1 जनवरी 2016 से पहले के पूर्व विधायकों को भी, जिनकी पेंशन राशि प्रतिमाह एक लाख से कहीं ऊपर, उन्हें भी प्रतिमाह 10 हज़ार रूपये विशेष यात्रा भत्ता प्राप्त होगा बेशक उनकी पेंशन कितनी भी हो.
इस सबके बीच हेमंत ने एक रोचक परन्तु महत्वपूर्ण पॉइंट उठाते हुए बताया देश के जिन भी राज्यों में आज भाजपा शासित सरकारें हैं, वह सभी अपने अपने प्रदेश में शासन और प्रशासन की व्यवस्था में गुजरात मॉडल का अनुसरण करने का दावा करती है. हालांकि गुजरात मॉडल का एक पहलू ऐसा भी है जिसे लागू करना अन्य राज्यों की भाजपा या किसी पार्टी की सरकार के लिए कतई सहज नहीं है.
हेमन्त ने बताया कि देश में गुजरात ऐसा इकलौता राज्य है जहाँ प्रदेश विधानसभा के पूर्व सदस्यों (विधायकों) को पेंशन ही नहीं मिलती है. हालांकि वर्ष 1984 में तत्कालीन माधव सिंह सोलंकी के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार द्वारा पूर्व विधायकों को पेंशन देने सम्बन्धी विधानसभा से कानून बनाया गया था हालांकि उसकी अनुपालना नहीं हो सकी. सितम्बर, 2001 में तत्कालीन केशुभाई पटेल के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार ने विधानसभा द्वारा उपरोक्त 1984 कानून को ही रद्द करवा दिया था. उसी वर्ष 7 अक्टूबर 2001 को नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री बने परन्तु उन्होंने भी अपने तेरह वर्षो के शासनकाल में प्रदेश के पूर्व विधायकों को पेंशन देने सम्बन्धी कोई नया कानून नहीं बनवाया. मोदी के बाद पहले आनंदीबेन पटेल, फिर दिवंगत विजय रुपाणी और मौजूदा मुख्यमंत्री भूपेन्द्र भाई पटेल के कार्यकाल में भी पूर्व विधायकों को पेंशन की व्यवस्था नहीं की गई है.

















