Haryana News: हरियाणा में किसानों से जुड़ी बड़ी खबर सामने आ रही है। अब पति-पत्नी को छोड़कर साझे खाते की जमीन का बंटवारा खून के रिश्तों में भी होगा।
दरअसल, विधानसभा में गुरुवार को हरियाणा भू-राजस्व (संशोधन) विधेयक पारित कर दिया गया। पूर्व CM मनोहर लाल की सरकार में संयुक्त मालिकों में साझी जमीन का बंटवारा करने के लिए कानून में धारा 111-(क) को जोड़ा गया था। लेकिन, रक्त संबंधियों और पति-पत्नी को इससे अलग रखा गया था। इससे रक्त संबंधी सह-स्वामित्वकर्ताओं के बीच भी संयुक्त हिस्सेदारी के केस में मुकदमेबाजी हो रही है।
अदालतों में एक लाख से ज्यादा केस
सदन पटल पर विधेयक को रखते हुए राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री विपुल गोयल ने बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि नए कानून से प्रदेश के 14 से 15 लाख किसानों को राहत मिल सकेगी। उन्होंने कहा कि साझा भूमि के विवाद को लेकर सहायक कलेक्टर और तहसीलदार की अदालतों में एक लाख से ज्यादा केस चल रहे हैं।
उन्होंने कहा कि ऐसे में उन सभी मामलों में जहां कोई रक्त संबंधी सह-स्वामित्वकर्ता संयुक्त भूमि पर हिस्सेदारी की मांग करता है तो उनके लिए राहत के लिए नियमों में नई धारा जोड़ी गई है।
जिसमें पति-पत्नी को छोड़कर यह धारा सभी पर लागू होगी, चाहे साझी जमीन के मालिक खून के रिश्ते में ही क्यों न हों।
अधिनियम की धारा 114 के अनुसार राजस्व अधिकारी यह सुनिश्चित करेंगे कि कोई अन्य सह-स्वामी अपनी हिस्सेदारी की जमीन का बंटवारा करना चाहते हैं या नहीं। अगर हां तो उन्हें भी बंटवारे के लिए आवेदनकर्ताओं के रूप में जोड़ा जाएगा।
क्या कहा गया नए कानून में
नए कानून के अनुसार पति-पत्नी को छोड़कर सभी संयुक्त भू-मालिक, चाहे वे खून के रिश्ते में ही क्यों न हों, उन्हें संबंधित सहायक कलेक्टर एवं तहसीलदार के नोटिस जारी करने की तिथि से छह माह के भीतर बंटवारे का राजीनामा पेश करना होगा।
अगर निर्धारित अवधि में सभी संयुक्त भू-मालिकों द्वारा आपसी सहमति से भूमि विभाजन का करार पेश नहीं किया जाता तो राजस्व अधिकारी छह महीने का समय और दे सकते हैं। यदि सभी संयुक्त भू-मालिकों की ओर से आपसी सहमति से भूमि विभाजन का करार पेश किया जाता है, तो संशोधित अधिनियम की धारा 111-क (3) के अंतर्गत भूमि के विभाजन का इंतकाल धारा 123 के प्रविधान के अंतर्गत कर दिया जाएगा।
यदि सभी संयुक्त भू-मालिकों का आपसी सहमति से बंटवारा नहीं हो पाता है, तो सहायक कलेक्टर और तहसीलदार की कोर्ट 6 महीने के अंदर ऐसी जमीन का बंटवारा सुनिश्चित करने का काम करेंगी

















