Punjabसेना मेंं युवा देश सेवा के लिए भर्ती होता है। हर जवान का एक सपना है कि देश सेवा करते शहीद हो गया तो उसके लिए बडा गवे होगा। लेकिन आजकल सेना के लिए जो अगिनवीर भर्ती हो रहे है, उनको शहीद दर्जा क्योंं नहीं दिया जाता है।Earthquake in NCR : भूकंप के झटके, फिर हिली धरती, जानिए क्यों आते है Earthquake?
देश का पहला अग्निवीर फौजी जम्मू कश्मीर में हुआ शहीद हो गया है। लेकिन सरकार की पॉलिसी के आगे उसको शहीद का दर्जा नही दिया गया है। पूरे देश चर्चा जोरो पर है।
बता दे कि देश के सबसे कम उम्र 19 साल की उम्र में जम्मू कश्मीर में हुए देश का पहला अग्निवीर शहीद अमृतपाल सिंह की डेडबॉडी पार्थिव शरीर उसके मानसा के गांव कोटली कलां में लेकर पहुंचे। 2 फौजी वो भी सिविल ड्रेस ओर प्राइवेट एम्बुलेंस में छोड़ कर चले गए ।
ये दिया जबाव: जो मानसा जिले का गांव कोटली कलां के वासी हैं उन्होंने फ़ौजियों से पूछा के ये शहीद हुए है तो इसको मान सम्मान मिलना चाहिए । इस पर फौजी बोले सरकार की नई पॉलिसी के तहत अग्निवीर को शहीद का दर्जा नही मिल सकता ।अलवर के सांसद का धारूहेड़ा में किया स्वागत
ना ही सरकार इसको सलामी दे सकती हैं । सेना ने एक बयान में कहा कि सिंह की मौत खुद को गोली मार लेने के कारण हुई थी, इसलिए मौजूदा नीति के अनुसार उन्हें कोई ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ नहीं दिया गया या सैन्य अत्येष्टि नहीं की गई।

पूरे देश हो रहा विरोध: एक्ससर्विस मैन अग्निवीर भर्ती का विरोध कर रहे है । देश की सेवा करने वाले सैनिको के साथ ये भेदभाव क्यों किया जा रहा है।
राघव चड्ढा ने भी उठाए सवाल
अग्निवीर अमृतलाल की मृत्यु पर आम आदमी पार्टी के सांसद राघव चड्ढा ने भी केंद्र सरकार पर निशाना साधा है. उन्होंने कहा कि अग्निवीर योजना जब आई थी, तब आम आदमी पार्टी ने उस पर सवाल उठाए थे. आज जिसका डर था वही हुआ है. जब उनका शव लाया गया, घर तो कोई भी सैन्य सम्मान नहीं दिया गया. उन्हें या उनके परिवार वालों को न कोई पेंशन दी जाएगी, न ही शहीद का दर्जा दिया जाएगा. ऐसा क्यों हुआ कि उनके शव को प्राइवेट एंबुलेंस ने भेजा गया. क्या यह है अग्निवीर स्कीम की असली सच्चाई.
















