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Rewari News: बावल औद्योगिक क्षेत्र में 132 केवी सब स्टेशन की योजना अधर में, यहां जानिए क्या है बडी वजह

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बावल औद्योगिक क्षेत्र में 132 केवी सब स्टेशन की योजना अधर में, यहां जानिए क्या है बडी वजह
बावल औद्योगिक क्षेत्र में 132 केवी सब स्टेशन की योजना अधर में, यहां जानिए क्या है बडी वजह

Rewari News: रेवाड़ी जिले के बावल औद्योगिक क्षेत्र में प्रस्तावित 132 केवी गैस आधारित सब स्टेशन की योजना जमीन के पजेशन के अभाव में ढाई वर्ष से ठंडे बस्ते में पड़ी है। हरियाणा विद्युत प्रसारण निगम (एचवीपीएन) की ओर से हरियाणा राज्य औद्योगिक एवं अवसंरचना विकास निगम (एचएसआईआईडीसी) को कई बार पत्राचार किया गया, लेकिन अब तक जमीन उपलब्ध नहीं कराई गई है।

इस देरी का खामियाजा क्षेत्र की औद्योगिक इकाइयों को उठाना पड़ रहा है, जिन्हें ओवरलोडिंग और अघोषित बिजली कटों का सामना करना पड़ रहा है। गर्मियों में यह स्थिति और गंभीर हो जाती है जिससे उत्पादन प्रभावित होता है।Rewari News

उल्लेखनीय है कि एचवीपीएन ने दो वर्ष पहले धारूहेड़ा और बावल में गैस इंसुलेटिड सब स्टेशन (जीआईएस) तकनीक पर आधारित बिजली सब स्टेशन बनाने की योजना बनाई थी। इस योजना को वित्त वर्ष 2023-24 में मुख्यालय से स्वीकृति मिल गई थी और बजट भी जारी किया जा चुका है।

BAWAL HSIIDC
बावल में बनने वाले सब स्टेशन पर लगभग 42 करोड़ रुपये की लागत अनुमानित है, लेकिन जमीन का पजेशन न मिलने के कारण टेंडर प्रक्रिया रुकी हुई है। वहीं धारूहेड़ा में इसी तकनीक पर बन रहे सब स्टेशन की टेंडरिंग प्रक्रिया जारी है।

गौरतलब है कि जीआईएस तकनीक पर आधारित सब स्टेशन आधुनिक और अधिक दक्ष होते हैं, जिनमें पारंपरिक सब स्टेशनों की तुलना में कम जगह की आवश्यकता होती है। यह तकनीक महंगी जमीन वाले क्षेत्रों के लिए उपयुक्त मानी जाती है क्योंकि इसमें केवल आधा एकड़ जमीन पर्याप्त होती है। जीआईएस में उपकरण काफी कम दूरी पर लगे होते हैं और गैस आधारित इन्सुलेशन होने के कारण यह सुरक्षित भी होते हैं।

एचएसआईआईडीसी बावल के सहायक महाप्रबंधक अशोक यादव ने बताया कि मुख्यालय से आवश्यक अनुमति मांगी है और अनुमति मिलते ही एचवीपीएन को जमीन का पजेशन दे दिया जाएगा। लेकिन सवाल यह है कि जब बजट स्वीकृत हो चुका है, तकनीक तय हो चुकी है और योजना तैयार है, तो केवल पजेशन में देरी क्यों हो रही है? ढाई साल से अधर में लटकी यह परियोजना न केवल सरकारी कार्यशैली पर सवाल उठाती है बल्कि औद्योगिक विकास की रफ्तार पर भी ब्रेक लगा रही है।