Surajkund Mela: मेघालय के कारीगरों के बांस से बने गहनों की हो रही धूम

On: February 9, 2025 11:12 AM
Follow Us:

Surajkund Mela, जो हर साल फरीदाबाद में आयोजित होता है, इस साल तीसरे दिन भी अपने रंगों और संस्कृति के साथ चमक रहा है। इस मेले में देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों का तांता लगा हुआ है। खासकर महिला वर्ग में इस बार बांस से बनी सुंदर और कलात्मक ज्वेलरी की काफी मांग है, जो मेघालय के कारीगरों द्वारा तैयार की जा रही है। यह कारीगर कई पीढ़ियों से बांस से विभिन्न प्रकार के उत्पाद बना रहे हैं, और इस साल पहली बार सूरजकुंड मेला में अपनी कला का प्रदर्शन कर रहे हैं।

मेघालय के कारीगरों की अनोखी कला

सूरजकुंड मेला में मेघालय की कारीगर तेस्बे ने पहली बार अपनी पारंपरिक बांस कला का प्रदर्शन किया है। तेस्बे बताती हैं कि उनका परिवार कई पीढ़ियों से बांस के उत्पाद बनाने का काम कर रहा है। उनकी मां ने यह कला अपनी दादी से सीखी थी। पहले उनका परिवार बांस से केवल बास्केट, होम डेकोरेशंस और कुर्सियां बनाता था, लेकिन पिछले कुछ सालों से उनकी मां ने महिलाओं के लिए बांस से गहनों का निर्माण करना शुरू किया।

तेस्बे कहती हैं, “मेरे परिवार में यह कला पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही है। बचपन में मैंने अपनी मां को बांस काटते और विभिन्न उत्पाद बनाने में व्यस्त देखा। मेरी मां ने बांस से गहनों का निर्माण शुरू किया, जो आजकल काफी लोकप्रिय हो गए हैं।”

बांस से बनने वाले गहनों की प्रक्रिया

मेघालय के कारीगर बांस से गहनों का निर्माण करते समय एक खास प्रक्रिया का पालन करते हैं। सबसे पहले, बांस को जंगल से काटा जाता है। उसके बाद, बांस को पांच दिनों तक पानी में डुबोकर रखा जाता है, ताकि वह पूरी तरह से नरम हो जाए और उसे किसी भी आकार में ढाला जा सके। पानी में सोखने के बाद, बांस को एक तेज़ चाकू से बारीकी से काटा जाता है। इस प्रक्रिया के बाद, कारीगरों द्वारा बांस से नथ, कान की बालियां, कान के टॉप्स, नउलखा हार और अन्य खूबसूरत गहने बनाए जाते हैं।

बांस से बने गहने

तेस्बे के मुताबिक, “हमारी कला केवल पारंपरिक नहीं है, बल्कि यह हमारे पर्यावरण के प्रति हमारे सम्मान का प्रतीक भी है। बांस एक प्राकृतिक सामग्री है, जो न केवल पर्यावरण के अनुकूल है, बल्कि बहुत मजबूत भी होती है। इस सामग्री से बने गहने महिलाओं के लिए एक नई तरह की सुंदरता लेकर आते हैं।”

बांस से बने गहनों की विशेषताएं

बांस से बने गहने केवल आकर्षक ही नहीं, बल्कि हल्के और टिकाऊ भी होते हैं। बांस के गहनों में एक खास प्रकार की प्राकृतिक खूबसूरती होती है, जो उन्हें अन्य गहनों से अलग बनाती है। इन गहनों की डिज़ाइन साधारण, लेकिन बहुत ही आकर्षक होती है। इनमें विभिन्न रंगों और आकारों के बांस के टुकड़े होते हैं, जिन्हें बारीकी से काटा और जोड़ा जाता है। नथ और हार जैसे गहनों में बांस की पतली-पतली लकड़ी का इस्तेमाल किया जाता है, जबकि कान की बालियां और टॉप्स में बांस को मोड़कर विभिन्न रूप दिए जाते हैं।

इन गहनों का उपयोग न केवल पारंपरिक अवसरों पर, बल्कि आधुनिक समय में भी किया जा रहा है। महिलाएं इन्हें किसी भी आउटफिट के साथ आसानी से पहन सकती हैं। बांस के गहनों का एक और खास पहलू यह है कि वे काफी हल्के होते हैं, जिसे पहनना बहुत आरामदायक होता है।

सूरजकुंड मेला में पर्यटकों की दिलचस्पी

सूरजकुंड मेला इस समय भारत और विदेशों से आए पर्यटकों का आकर्षण केंद्र बना हुआ है। मेले में विभिन्न राज्यों और देशों के कारीगर अपनी कला और शिल्प का प्रदर्शन कर रहे हैं। मेघालय के कारीगरों द्वारा बनाए गए बांस के गहनों का यहां विशेष आकर्षण है। पर्यटक इन गहनों की न केवल खरीदारी कर रहे हैं, बल्कि इस अनोखी कला के बारे में भी जानने के लिए उत्साहित हैं।

तेस्बे बताती हैं, “यह मेरा पहला अनुभव है, जब मैंने सूरजकुंड मेले में भाग लिया है। यहां पर लोगों की प्रतिक्रिया बहुत ही उत्साहवर्धक रही है। पर्यटक बांस से बने गहनों को देखकर बहुत खुश होते हैं और वे हमारी कला के बारे में बहुत कुछ सीखने के लिए तैयार रहते हैं।”

पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी

बांस से बने गहने न केवल पारंपरिक कला को बढ़ावा देते हैं, बल्कि पर्यावरण के प्रति एक सकारात्मक संदेश भी भेजते हैं। बांस एक नवीकरणीय संसाधन है, जिसे आसानी से उगाया जा सकता है और जो प्राकृतिक रूप से पर्यावरण के अनुकूल है। यह अपने आकार और उपयोगिता के मामले में भी बहुत विविधता प्रदान करता है, जिससे इसके उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है।

तेस्बे का कहना है, “हमारे गहनों का निर्माण पूरी तरह से पारंपरिक तरीके से होता है, और हम इसे बिना किसी रासायनिक सामग्री के तैयार करते हैं। इससे हमें न केवल अपनी कला को बचाए रखने में मदद मिलती है, बल्कि हम पर्यावरण के प्रति भी अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं।”

समृद्धि और सांस्कृतिक धरोहर

सूरजकुंड मेला मेघालय के कारीगरों के लिए अपनी कला को प्रदर्शित करने का एक बेहतरीन प्लेटफार्म है। इस मेले के माध्यम से कारीगर अपनी पारंपरिक कला को न केवल देश भर में, बल्कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी प्रदर्शित कर पा रहे हैं। यह उनके लिए न केवल एक आर्थिक अवसर है, बल्कि अपनी सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित रखने का एक तरीका भी है।

तेस्बे और उनके परिवार के कारीगर बांस के गहनों को बनाने में गर्व महसूस करते हैं, क्योंकि यह न केवल उनकी पहचान है, बल्कि मेघालय की संस्कृति और कला का भी एक अहम हिस्सा है। सूरजकुंड मेला के मंच से उन्होंने अपनी कला को साझा कर पूरी दुनिया में अपनी कला का परचम लहराया है।

सूरजकुंड मेला में बांस से बने गहनों की मांग बढ़ना यह साबित करता है कि पारंपरिक कला और शिल्प में आधुनिकता का समावेश किया जा सकता है। मेघालय के कारीगरों की यह कला न केवल उनके लिए, बल्कि समग्र भारतीय संस्कृति के लिए एक गर्व की बात है। बांस से बने गहनों का आकर्षण और उनकी अनोखी प्रक्रिया पर्यटकों को बेहद आकर्षित कर रही है, और यह कला आने वाले वर्षों में और भी समृद्धि प्राप्त करेगी।

Harsh

हर्ष चौहान पिछले तीन साल से पत्रकारिता में कार्यरत हूं। इस साइट के माध्यम से अपराध, मनोरंजन, राजनीति व देश विदेश की खबरे मेरे द्वारा प्रकाशित की जाती है। मै बतौर औथर कार्यरत हूं

Join WhatsApp

Join Now

google-newsGoogle News

Follow Now