Haryana:लगभग एक दशक के लंबे अंतराल के बाद कांग्रेस द्वारा जिलाध्यक्षों की नियुक्ति किए जाने से संगठन में नई ऊर्जा आई है, लेकिन ब्लॉक अध्यक्षों की नियुक्ति को लेकर अंदरखाने असंतोष भी उभरकर सामने आ रहा है। अहीरवाल क्षेत्र में ब्लॉक अध्यक्षों के चयन को लेकर पार्टी के भीतर अलग-अलग स्तरों पर नाराजगी की चर्चाएं तेज हो गई हैं।
बताया जा रहा है कि कुछ वरिष्ठ नेता अपने करीबी समर्थकों को संगठन में जिम्मेदारी दिलाना चाहते हैं, जबकि जिलाध्यक्ष अपने स्तर पर पसंदीदा नामों को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं।
पार्टी सूत्रों के अनुसार, ब्लॉक अध्यक्षों की नियुक्ति को लेकर गुटबाजी साफ दिखाई देने लगी है। संगठनात्मक संतुलन बनाए रखने के लिए जिलाध्यक्षों को अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाले ब्लॉकों के लिए नाम सुझाने को कहा गया है, लेकिन कई स्थानों पर वरिष्ठ नेताओं की सिफारिशों को भी तवज्जो दी जा रही है। इसी खींचतान के चलते नियुक्ति प्रक्रिया अपेक्षा से अधिक समय ले रही है और कार्यकर्ताओं में असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
अहीरवाल क्षेत्र में ग्रामीण और शहरी संतुलन साधने की रणनीति पर भी जोर दिया जा रहा है। पार्टी के कुछ नेता मानते हैं कि ब्लॉक स्तर पर मजबूत और सक्रिय कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी देकर संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत किया जा सकता है, वहीं कुछ वरिष्ठ नेता पुराने और भरोसेमंद समर्थकों को ही आगे बढ़ाने के पक्ष में हैं। इसी कारण कई नामों पर सहमति नहीं बन पा रही है और चर्चाओं का दौर लगातार जारी है।
पार्टी के जानकारों का कहना है कि आगामी चुनावों को देखते हुए कांग्रेस नेतृत्व ब्लॉक अध्यक्षों की नियुक्ति में कोई जोखिम नहीं लेना चाहता। संगठन चाहता है कि ऐसे कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी दी जाए, जो क्षेत्र में प्रभाव रखते हों और पार्टी की विचारधारा को मजबूती से आगे बढ़ा सकें। हालांकि, नियुक्तियों में देरी और अंदरूनी मतभेद यदि जल्द नहीं सुलझे तो इसका असर संगठनात्मक गतिविधियों और कार्यकर्ताओं के मनोबल पर पड़ सकता है। फिलहाल, कांग्रेस नेतृत्व सभी पक्षों से बातचीत कर संतुलित निर्णय लेने की कोशिश में जुटा हुआ है।
















