Haryana: फरीदाबाद जिले के फरुुखनगर ब्लॉक के ताजनगर गांव में जल्द ही आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित बहुउद्देश्यीय पशु ट्रॉमा सेंटर का निर्माण होगा। ग्राम पंचायत ने इस प्रस्तावित केंद्र के लिए छह एकड़ भूमि प्रदान की है। अब पंचायत विभाग के निदेशक को भूमि का अधिकार पंचायत से विभाग को स्थानांतरित करने के लिए फ़ाइल भेजी गई है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने इस केंद्र के निर्माण की घोषणा की थी और पशुपालन एवं डेयरी विभाग इस कार्य को प्राथमिकता दे रहा है। भूमि हस्तांतरण के साथ ही निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा।
यह केंद्र ग्रामीण क्षेत्रों के पशुपालकों को आपातकालीन चिकित्सा सुविधा प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। तेजी से बढ़ती जनसंख्या और क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी को देखते हुए यह परियोजना लंबे समय से चर्चा में थी। इस पॉलीक्लिनिक ट्रॉमा सेंटर में प्राथमिक उपचार, दुर्घटना प्रबंधन, आपातकालीन चिकित्सा, प्रयोगशाला सेवाएँ और अन्य स्वास्थ्य सुविधाएँ उपलब्ध कराई जाएंगी। यह केंद्र विशेष रूप से पताौड़ी और फरुुखनगर ब्लॉकों के पशुपालकों के लिए लाभकारी साबित होगा, क्योंकि इन क्षेत्रों में पशुपालन अधिकतम ग्रामीण आबादी द्वारा किया जाता है।
जिला पशु जनगणना और आवश्यकता
गुरुग्राम जिले में पशुओं की जनगणना (नवंबर 2025) के अनुसार, पताौड़ी ब्लॉक में सबसे अधिक भैंसें (57,146) हैं, जबकि फरुुखनगर ब्लॉक में भैंसों की संख्या 21,638 है। इन ब्लॉकों में कुल मिलाकर गाय और भैंस की संख्या लगभग 1,70,000 है। इसके अतिरिक्त, पताौड़ी ब्लॉक के पशु मालिकों के पास 4,400 बकरियाँ भी हैं। जिले में वर्तमान में 27 पशु अस्पताल कार्यरत हैं। इस आंकड़े से यह स्पष्ट होता है कि नए ट्रॉमा सेंटर की आवश्यकता अत्यधिक है, क्योंकि पशुपालक आपातकालीन सेवाओं के लिए कई बार दूर-दराज के अस्पतालों तक जाने के लिए मजबूर होते हैं।
निर्माण की प्रक्रिया और प्रशासनिक तैयारी
पंचायत ने भूमि हस्तांतरण के लिए प्रस्ताव पंचायत निदेशक को भेज दिया है। विभागों के बीच कागजी कार्रवाई पूरी होने के बाद निर्माण कार्य शीघ्र शुरू किया जाएगा। पशुपालन और डेयरी विभाग के उप निदेशक डॉ. नरेंद्र सिंह ने बताया कि केंद्र के निर्माण के लिए सभी तैयारियाँ पूरी कर ली गई हैं। किसान क्लब के अध्यक्ष राव मन सिंह ने इसे पशुपालन और किसानों के विकास की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया। इस केंद्र के निर्माण से न केवल आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं में सुधार होगा, बल्कि पशुपालकों की आय और पशु स्वास्थ्य में भी सुधार होगा।

















