हरियाणा: हरियाणा के कुम्हार जो मिट्टी से दूर होते जा रहे थे अब उसी मिट्टी से उनकी किस्मत बदलेगी। इसके लिए हरियाणा माटी कला बोर्ड ने एक खास योजना बनाई है जो उन्हें आर्थिक और तकनीकी मदद देगी।
अब कुम्हार पुराने चाक की बजाय सोलर या इलेक्ट्रिक चाक से काम करेंगे। सिर्फ दीये या गुल्लक नहीं बल्कि सजावटी और जरूरत की चीजें बनाकर नई पहचान पाएंगे।
गुजरात सरकार ने माटी कला को प्रोत्साहित करने के लिए जो मॉडल अपनाया था उसे अब हरियाणा में भी लागू किया जाएगा। गांवों में कुम्हारों के लिए जमीन दी जाएगी और जरूरत हो तो पास के गांव से मिट्टी लाई जाएगी।
बोर्ड ने कुम्हारों की गिनती और मिट्टी की जांच शुरू कर दी है। पहले चरण में चार जिलों के 700 से अधिक कुम्हारों की सूची तैयार हो चुकी है जिनमें से 100 ने पोर्टल पर पंजीकरण भी कर लिया है।
पंजीकरण करने वाले कुम्हारों को सरकार की MSME योजना के तहत मुफ्त टूल किट और 2 लाख रुपये तक का लोन मिलेगा। समय पर चुकाने पर 1 लाख और मिल सकता है। 35% तक की सब्सिडी भी योजना का हिस्सा है।

















