Maharana Pratap Death Anniversary : भारत में वीर सपूतों की धरती है। समय-समय पर इस धरती को राजपूतों और वीरों ने अपने अदम्य साहस से प्रेरित किया है। महाराणा प्रताप ऐसे ही एक महान योद्धा हैं। इनकी वीरता के आगे किसी की भी कहानी नहीं टिकती है। उन्होंने राजस्थान ही नहीं भारत की शान को भी एक विशेष स्थान दिया। मेवाड़ के राजा रहे महाराणा ने जीवन में कभी किसी दासता मंजूर नहीं की।
रेवाड़ी में होगा इन दिन कार्यक्रम: बता दे हरियाणा के जिला रेवाड़ी में- हर वर्ष की भांति सोमवार 19 जनवरी को स्थानीय महाराणा प्रताप चौक पर वीर शिरोमणि की 429 वीं पुण्य तिथि पर आयोजन किया जा रहा है। महाराणा प्रताप जयंती समिति के तत्वावधान में सुबह 10 बजे वैदिक हवन और 11 बजे महाराणा की प्रतिमा पर पुष्पांजलि आयोजित की जाएगी।

समिति महासचिव गजराज सिंह चौहान ने बताया कि आयोजन में महाराणा के जीवन दर्शन की विशेषता राष्ट्रवाद,स्वाभिमान और पराक्रम के संकल्प को सर्व समाज की भागीदारी आत्मसात करने का संकल्प लेगी।
हल्दी घाटी का युद्ध: महाराणा प्रताप की वीरता की पुष्टि उनके युद्ध की घटनाएं करती हैं जिनमें सबसे प्रमुख 8 जून 1576 ईस्वी में हुए हल्दी घाटी के युद्ध का युद्ध था जिसमें महाराणा प्रताप की लगभग 3,000 घुड़सवारों और 400 भील धनुर्धारियों की सेना ने आमेर के राजा मान सिंह के नेतृत्व में लगभग 5,000-10,000 लोगों की सेना को लोहे के चने चबवा दिए थें।
19 जनवरी को हुआ था निधन: अपनी सेना से कई गुना ज्यादा ताकतवर अकबर की सेना से लोहा लेकर उन्होंने साबित कर दिया कि वे ही सही मायनों में महाराणा थे। अकबर ने बहुत कोशिश की और आखिरकार उसे उन्हें पकड़ने का ख्याल दिल से निकलना पड़ा। महाराणा प्रताप का निधन 19 जनवरी 1597 को हुआ था।

















