हरियाणा में 15451 टीचरों के पद खाली, जानिए किस जिलें में है सबसे ज्यादा

On: March 5, 2026 8:13 PM
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15,451 teacher posts are vacant in Haryana, find out which district has the most....

हरियाणा के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों के खाली पदों को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। विधानसभा में पूछे गए एक प्रश्न के जवाब में शिक्षा मंत्री महीपाल ढांडा ने स्वीकार किया हरियाणा में 15,451 शिक्षकों के पद खाली हैं। शिक्षा को लेकर ये आकंडा बहुत बडा और चौकाने वाला है। हर साल सरकार दावे करती है रिक्त पद भरे जा रहे फिर सवाल यह है इतने ज्यादा कैसे खाली है।

जनिए किस जिले सबसे पद है खाली: हाल में जारी सरकारी आंकड़ों के मुताबिक नूंह जिला शिक्षकों की कमी के मामले में सबसे अधिक प्रभावित है, जहां 4,954 पद रिक्त हैं। इसके बाद यमुनानगर में 1,721, पलवल में 1,595, गुरुग्राम में 1,130 और फरीदाबाद में 934 पद खाली हैं। अंबाला में 925, सिरसा में 914, सोनीपत में 551 और रोहतक में 314 शिक्षकों की कमी दर्ज की गई है। पूरे हरियाणा की बात करें तो 15451 पद फिलहाल खाली है।

यहां भी गंभीर स्थिति: ​शिक्षा विभाग के अनुसार हरियाण के भिवानी, चरखी दादरी, फतेहाबाद, जींद, कैथल, करनाल, कुरुक्षेत्र, महेंद्रगढ़ और रेवाड़ी जैसे नौ जिलों में प्राथमिक शिक्षक सरप्लस हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति पोस्टिंग और ट्रांसफर नीति में सुधार की मांग करती है ताकि जहां जरूरत अधिक है वहां शिक्षकों की प्रभावी तैनाती की जा सके।

स्कूली शिक्षा व्यवस्था के सामने खड़ी चुनौतिया: इतने ज्यादा पद खाली होना चिंता का विषय है। यहीं कारण है प्राइवेट स्कूलों ​में बच्चो की संख्या बढती जा रही है जबकि सरकारी स्कूल बदं होने के कगार पर है। क्योंकि ये आंकड़ा राज्य की स्कूली शिक्षा व्यवस्था के सामने खड़ी चुनौतियों की ओर संकेत करता है।

सवाल के जबाव में हुआ खुलासा’ बता दे कि कैथल से कांग्रेस विधायक आदित्य सुरजेवाला द्वारा पूछे गए सवाल के जबाव ये सामने आया है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार स्नातकोत्तर शिक्षकों (PGT) के 3,998 पद, प्रशिक्षित स्नातक शिक्षक (TGT) और मौलिक स्कूल हेडमास्टर (ESHM) के 7,707 पद तथा प्राथमिक शिक्षक (PRT) और प्रधान शिक्षक के 3,746 पद खाली पड़े हैं।

 

इतने बड़े स्तर पर रिक्तियां होने के बावजूद कुछ जिलों में प्राथमिक शिक्षकों की संख्या आवश्यकता से अधिक है, जिससे तैनाती और समायोजन को लेकर असंतुलन की स्थिति सामने आई है।

विद्यार्थी-शिक्षक अनुपात को लेकर शिक्षा मंत्री ने बताया कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत प्राथमिक स्तर पर 30 छात्रों पर एक शिक्षक का प्रावधान है, जबकि हरियाणा में औसतन 27 विद्यार्थियों पर एक शिक्षक उपलब्ध है। उच्च प्राथमिक स्तर पर 50 विद्यार्थियों के सेक्शन पर एक शिक्षक की जरूरत होती है, जबकि प्रदेश में 18 विद्यार्थियों पर एक शिक्षक तैनात है। माध्यमिक और वरिष्ठ माध्यमिक स्तर पर 22 विद्यार्थियों पर एक शिक्षक पढ़ा रहा है। सरकार का तर्क है कि कुल अनुपात संतोषजनक है, लेकिन विषय-विशेष और क्षेत्रवार कमी के कारण व्यावहारिक समस्याएं बनी हुई हैं।

सुविधाए भी बदहाल: स्कूलो के स्टाफ ही नहीं बुनियादी ढांचे की स्थिति पर भी विधानसभा में जानकारी मांगी तो चौकाने वाले आंकडे मिले।। सरकार के अनुसार सभी सरकारी स्कूलों में शौचालय और पीने के पानी की सुविधा उपलब्ध है। 124 स्कूलों में अतिरिक्त शौचालय निर्माण के लिए करीब दो करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए भी सुविधाएं शामिल होंगी।

हालांकि प्रदेश के 135 सरकारी स्कूलों में अब भी चारदीवारी नहीं है। इनमें झज्जर के 16, पलवल के 15, पंचकूला और रेवाड़ी के 12-12 तथा अंबाला और यमुनानगर के 10-10 स्कूल शामिल हैं।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि केवल समग्र अनुपात बेहतर होने से जमीनी स्तर की समस्याएं खत्म नहीं होतीं। ।

 

Sunil Chauhan

मै पिछले दस साल से पत्रकारिता में कार्यरत हूं। जल्दी से जल्दी देश की की ताजा खबरे को आम जनता तक पहुंचाने के साथ समस्याओं को उजाकर करना है।

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