Haryana News: हरियाणा के बिजली विभाग में काम कर रहे लोअर डिवीजन क्लर्क (LDC) कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत की खबर आई है। सरकार ने उन 28 कर्मचारियों को नौकरी से हटाने का आदेश वापस ले लिया है, जो पिछले छह साल से कार्यरत थे। अब ये सभी कर्मचारी अपने पुराने पदों पर पूर्ववत शर्तों के साथ कार्य करते रहेंगे।
मामला वर्ष 2016 की उस भर्ती से जुड़ा है, जिसमें 964 पदों पर LDC नियुक्त किए गए थे। हाल ही में पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि सभी चयनित अभ्यर्थियों को उपलब्ध रिक्त पदों पर समायोजित किया जाए। लेकिन बिजली विभाग ने इस आदेश को गलत समझ लिया और कई कार्यरत कर्मचारियों को हटाने के आदेश जारी कर दिए। इससे दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (DHBVN) के कर्मचारियों में असंतोष और डर फैल गया।
जब यह मामला कर्मचारियों के सामने आया तो उन्होंने बिजली मंत्री अनिल विज और मुख्य प्रधान सचिव राजेश खुल्लर से हस्तक्षेप की मांग की। मामले की गंभीरता को देखते हुए विभाग ने त्वरित कार्रवाई की और पुराने आदेश रद्द कर दिए। नए आदेश में स्पष्ट किया गया है कि सभी कर्मचारी अपने पदों पर बने रहेंगे और उनकी वरिष्ठता, वेतन भत्ते तथा अनुभव पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
भर्ती प्रक्रिया का लंबा विवाद
इन कर्मचारियों की भर्ती हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग द्वारा विज्ञापन संख्या 03/2016 के तहत की गई थी। 2019 में इसका फाइनल रिजल्ट जारी हुआ और नियुक्तियां दी गईं। लेकिन जनवरी 2020 में आयोग ने संशोधित परिणाम जारी किया जिससे कई उम्मीदवार बाहर हो गए। मामला हाई कोर्ट तक पहुंचा और 2024 में कोर्ट ने ‘सुजाता रानी बनाम राज्य सरकार’ केस में आदेश दिया कि सभी चयनित उम्मीदवारों को समायोजित किया जाए।
अब सुरक्षित हुई छह साल की मेहनत
विभाग द्वारा आदेश वापस लेने के बाद इन LDC कर्मचारियों की नौकरी और उनका भविष्य दोनों सुरक्षित हो गए हैं। लंबे समय से असमंजस में चल रहे इन कर्मचारियों ने राहत की सांस ली है। अब वे निश्चिंत होकर अपने दायित्वों का निर्वहन कर सकेंगे।

















