Haryana News: भले में हरियाणा नशा करने परोसने वालों पर कार्रवाई के लिए दबीश दी जा रही है, लेकिन नशीले पदार्थों की बिक्री पर प्रतिबंध होने के बावजूद शहर व ग्रामीण क्षेत्र में शिक्षण संस्थानों के पास धडल्ले से बिक्री जारी है। सबसे अहम बातत यह है कि स्कूलों के मुख्य द्वार पर दुकानें सज गई हैं जिन पर गुटखा, बीड़ी व सिगरेट बेची जा रही है।
कोई सुनवाई नहीं: ऐसा नही है पुलिस प्रशासन को इसका पता नही है लेकिन इस ओर न तो शिक्षा विभाग और न ही प्रशासनिक अधिकारी कोई ध्यान दे रहे हैं। यही कारण है स्कूल, कंपनी व संस्थनों के आसपास दुकानों पर बीड़ी, सिगरेट से लेकर तंबाकू व गुटखा आदि नशीले पदार्थ बिना किसी रोक-टोक के खुलेआम बेचे जा रहे हैं। Haryana News
बच्चे भी हुए आदि: धीरे धीरे छोटे-छोटे बच्चे गुटखा खाने के साथ-साथ बीड़ी, सिगरेट पीने लगे हैं।
यूं तो हरियाण सरकार ने सभी स्कूल परिसरों के आसपास 100 मीटर की परिधि में धूम्रपान व नशीले पदार्थों की बिक्री पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगा रखा है। स्कूलों के बाहर चेतावनी लिखनी जरूरी है, लेकिन स्कूलों के बाहर यह चेतावनी नजर नहीं आती। बल्कि शिक्षण संस्थानों के पास धडल्ले से बिक्री जारी है।Haryana News

बता दे कई दुकानदारो ने सरकारी व निजी स्कूलों के पास लोगों ने टॉफी व अन्य खाद्य सामग्री बेचने के लिए दुकानें खोल ली हैं अब बढती डिमां के चलते इन सामानों के साथ बीड़ी, सिगरेट, पान मसाला, गुटखा भी बेचना शुरू कर दिया है
तेजी से बढे रहे केस: बता दे कि स्कूल के नजदीक दुकानें होने के कारण बच्चे नशे के आदी हो रहे हैं। सबसे खराब स्थिति शहर में खुले स्कूलों की है, जहां मुख्य गेट से लेकर स्कूल के चारों तरफ नशीले पदार्थों की दुकानें हैं।
कब थमेगा ये खेल: शिक्षण संस्थानों के पास धडल्ले से बिक्री जारी है। सबसे अहम बातत यह है कि स्कूलों के मुख्य द्वार पर दुकानें सज गई हैं जिन पर गुटखा, बीड़ी व सिगरेट बेची जा रही है।Haryana News
जानिए कब बना था नियम: विश्व स्वास्थ्य संगठन ने अपनी 39 वीं विश्व स्वास्थ्य सभा में और 15 मई 1986 को आयोजित अपनी चौदहवीं पूर्ण बैठक में सदस्य देशों से बच्चों और युवाओं को तंबाकू के उपयोग की लत से बचाने के उपायों को लागू करने का आग्रह किया था ।
43 वीं विश्व स्वास्थ्य सभा ने 1990 में इस चिंता को फिर से दोहराया, जहाँ सदस्य देशों से तंबाकू नियंत्रण रणनीतियों पर विचार करने और कानून और अन्य प्रभावी उपायों की योजना बनाने का आग्रह किया गया, जिसमें अन्य बातों के अलावा, बच्चों को तंबाकू के धुएं के अनैच्छिक संपर्क से बचाना और सभी प्रकार के प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष विज्ञापन के माध्यम से तंबाकू के उपयोग को हतोत्साहित करना शामिल था।
सदस्य राज्य के रूप में, 18 मई 2003 को भारत ने सिगरेट और अन्य तम्बाकू उत्पाद (विज्ञापन का प्रतिषेध तथा व्यापार और वाणिज्य, उत्पादन, आपूर्ति और वितरण का विनियमन) अधिनियम, 2003 या सीओटीपीए अधिनियम, 2003 [2] को अधिनियमित किया । ऐसा इसलिए किया गयाHaryana News
क्योंकि ‘सार्वजनिक हित में और सार्वजनिक स्वास्थ्य की रक्षा के लिए तम्बाकू पर एक व्यापक कानून बनाना’ और ‘भारतीय संविधान के अनुच्छेद 47 के अनुसार सामान्य रूप से सार्वजनिक स्वास्थ्य को प्राप्त करने के उद्देश्य से सिगरेट और अन्य तम्बाकू उत्पादों के सेवन पर प्रतिबंध लगाना जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं’ को अधिनियमित करना समीचीन माना गया।Haryana News
















