Scam: देश के सबसे बड़े चिटफंड घोटालों में शामिल PACL (पीएसीएल) मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने जांच का दायरा हरियाणा तक बढ़ा दिया है। करीब 45,000 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के इस मामले में हरियाणा के कई जिलों में की गई जमीन और अन्य संपत्तियों को अब अपराध से अर्जित संपत्ति के रूप में चिह्नित किया जा रहा है। इस घोटाले में मुख्य आरोपी हर्सतिंदर पाल सिंह हेयर के खिलाफ दिल्ली स्थित PMLA कोर्ट ने ईडी की शिकायत पर संज्ञान लेते हुए मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किया है।
जांच एजेंसी के अनुसार, आरोपी हर्सतिंदर पाल सिंह ने PACL की अवैध कमाई से मुंबई, पंजाब और हरियाणा में बेशकीमती जमीनें और प्रॉपर्टी खरीदी थीं। ईडी का दावा है कि इनमें से लगभग 657 करोड़ रुपये की राशि विदेशों में भेजी गई, जिससे साफ होता है कि यह एक संगठित और अंतरराष्ट्रीय स्तर का वित्तीय अपराध है। इन संपत्तियों की खरीद फर्जी कंपनियों और बेनामी नामों के जरिए की गई थी, ताकि घोटाले का कोई सीधा संबंध न दिखे। अब ईडी इन सभी लेन-देन की पड़ताल कर रही है।
हरियाणा में जिन संपत्तियों की जांच की जा रही है, उनमें पंचकूला, करनाल, गुरुग्राम और रोहतक जैसे शहर शामिल हैं। बताया जा रहा है कि आरोपी ने इन जगहों पर करोड़ों की जमीनें खरीदी थीं, जिनका इस्तेमाल आगे और निवेशकों को फंसाने में किया गया। चौंकाने वाली बात यह है कि यह सब उस समय किया गया जब SEBI ने पहले ही PACL को निवेश इकट्ठा करने से मना कर दिया था।
PACL घोटाले में देशभर के करीब 5.5 करोड़ निवेशक प्रभावित हुए हैं, जिनमें बड़ी संख्या हरियाणा, पंजाब और राजस्थान के ग्रामीण निवेशकों की है। लोगों ने अपनी जीवनभर की बचत जमीन, घर या नकद के रूप में PACL में लगा दी थी। अब जब जांच एजेंसियों ने इस घोटाले पर शिकंजा कसना शुरू किया है, तब उम्मीद जगी है कि निवेशकों को कभी न कभी न्याय जरूर मिलेगा।
प्रवर्तन निदेशालय की टीम अब उन सभी दस्तावेजों को खंगाल रही है जिनसे यह पता चल सके कि किन-किन रीयल एस्टेट प्रोजेक्ट्स में PACL के पैसे का इस्तेमाल हुआ और कितनी संपत्तियां अब भी बेनामी हैं। यह देखना अहम होगा कि आगे चलकर कोर्ट इन संपत्तियों को जब्त कर निवेशकों को राहत पहुंचाने के लिए कौन से कदम उठाता है।

















