हरियाणवी लोक संस्कृति और संगीत हमेशा से अपनी सादगी, परंपरा और लोकभावना के लिए जाना जाता है। हाल ही में हरियाणवी लोकगीत Tattiri को लेकर शुरू हुआ विवाद अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। दरअसल, बॉलीवुड रैपर बादशाह द्वारा रिलीज किए गए ‘टटीरी’ के नए वर्जन को लेकर हरियाणा में कई सामाजिक संगठनों और कलाकारों ने आपत्ति जताई थी। इसी विवाद के बीच अब हरियाणवी कलाकारों ने इस गीत को नए अंदाज में गाकर अपनी प्रतिक्रिया दी है। 1 मार्च को रिलीज हुए बादशाह के ‘टटीरी’ सॉन्ग के बाद से ही यह गाना लगातार चर्चा में बना हुआ है। कुछ लोगों का मानना है कि इस गाने में हरियाणवी लोकसंस्कृति और परंपराओं को सही तरीके से प्रस्तुत नहीं किया गया। यही वजह है कि कई स्थानीय कलाकारों और सामाजिक संगठनों ने इसका विरोध किया और इसे यूट्यूब से हटाने की मांग भी उठाई।
लोकसंस्कृति की मर्यादा को लेकर उठी आवाज ?
विवाद के बीच अब हरियाणा के कलाकारों ने इस गीत का नया वर्जन पेश किया है। इस नए वर्जन को सिंगर सिमरन जागलान ने अपने अंदाज में गाया है। खास बात यह है कि इस गाने में उनके साथ उनके पिता कर्मबीर फौजी भी नजर आए, जिन्होंने गाने में रैप के जरिए अपनी बात रखी।
कर्मबीर फौजी ने अपने रैप में हरियाणा की संस्कृति और मर्यादा का जिक्र करते हुए कहा ? जहां बीरों का शर्माना हो और मर्यादा में गाना हो, न आवै कदे उल्हाना हो, ऐसा मेरा हरियाणा इस लाइन के जरिए उन्होंने यह संदेश देने की कोशिश की कि हरियाणा की पहचान उसकी संस्कृति, सम्मान और मर्यादा से है। कलाकारों का मानना है कि लोकगीतों को नए अंदाज में प्रस्तुत करना गलत नहीं है, लेकिन उसमें संस्कृति और परंपरा का सम्मान बनाए रखना जरूरी है।
स्थानीय कलाकारों का समर्थन और नया संदेश ?
सिमरन जागलान के अलावा हरियाणा के कैथल की रहने वाली सिंगर सुदेश ने भी ‘टटीरी’ के पुराने लोक वर्जन में कुछ नए लिरिक्स जोड़कर इसे पेश किया है। उन्होंने अपने गीत के माध्यम से सीधे तौर पर बादशाह को संबोधित करते हुए हरियाणवी लोकगीतों की गरिमा को बनाए रखने की बात कही। सुदेश का कहना है कि लोकगीत किसी एक कलाकार की संपत्ति नहीं होते, बल्कि वे पूरे समाज और संस्कृति की पहचान होते हैं। इसलिए जब भी कोई कलाकार इन्हें नए अंदाज में पेश करे तो उसे उस क्षेत्र की भावनाओं और परंपराओं का ध्यान जरूर रखना चाहिए। सोशल मीडिया पर भी इन नए वर्जन को काफी समर्थन मिल रहा है। कई लोग इसे हरियाणवी संस्कृति की आवाज बता रहे हैं। वहीं कुछ लोग इसे कलाकारों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा के रूप में भी देख रहे हैं।
महिला आयोग का समन और बढ़ता विवाद ?
‘टटीरी’ गाने को लेकर बढ़ते विवाद के बीच हरियाणा महिला आयोग भी इस मामले में सक्रिय हो गया है। आयोग ने रैपर बादशाह को समन जारी करते हुए 13 मार्च को पेश होने के लिए कहा है। आयोग का कहना है कि गाने में इस्तेमाल किए गए कुछ शब्द और प्रस्तुति आपत्तिजनक हो सकती है, इसलिए इस मामले में स्पष्टीकरण जरूरी है। वहीं कई सामाजिक संगठनों ने भी गाने को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की है। उनका कहना है कि हरियाणा की संस्कृति और महिलाओं की गरिमा को किसी भी तरह से आहत नहीं किया जाना चाहिए। हालांकि कुछ लोग यह भी मानते हैं कि संगीत में प्रयोग और बदलाव समय के साथ होते रहते हैं, लेकिन कलाकारों को यह समझना चाहिए कि लोकगीत केवल मनोरंजन का साधन नहीं बल्कि सांस्कृतिक धरोहर भी होते हैं। फिलहाल ‘टटीरी’ को लेकर शुरू हुआ यह विवाद अब एक सांस्कृतिक बहस का रूप ले चुका है। एक तरफ जहां कुछ लोग इसे रचनात्मक स्वतंत्रता का हिस्सा मानते हैं, वहीं दूसरी तरफ कई कलाकार और सामाजिक संगठन लोकगीतों की मूल भावना और मर्यादा को बनाए रखने की मांग कर रहे हैं आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि इस विवाद का क्या निष्कर्ष निकलता है। लेकिन इतना जरूर है कि इस पूरे मामले ने हरियाणवी लोकसंगीत और उसकी परंपराओं को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
















