Breaking news: बीड़ा औद्योगिक क्षेत्र में भूमि रूपांतरण और 90ए से जुड़ी फाइलों को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। सूचना का अधिकार कानून के तहत मांगी गई जानकारी देने से अधिकारियों और कर्मचारियों की हिचक साफ तौर पर सामने आ रही है। लाखों रुपये के वार्षिक बजट वाले विभाग में संसाधनों की कमी का बहाना बनाकर न केवल आवेदकों को गुमराह किया जा रहा है, बल्कि जवाब न देने के लिए अजीबोगरीब तर्क भी दिए जा रहे हैं।
मामला भिवाड़ी स्थित बीड़ा कार्यालय से जुड़ा है, जहां पिछले एक वर्ष में भूमि के व्यावसायिक, आवासीय और औद्योगिक उपयोग में परिवर्तन से संबंधित दर्जनों फाइलें लगाई गईं। इन फाइलों में 90ए प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेजों की जानकारी मांगी गई, लेकिन अधिकारियों ने सूचना देने से बचने का रास्ता अपनाया। आरटीआई के तहत 20 नवंबर 2025 तक मांगी गई जानकारी के जवाब में यह कह दिया गया कि सूचना तृतीय पक्ष से संबंधित है, इसलिए उपलब्ध नहीं कराई जा सकती। जब इस पर अपील की गई तो वहां भी संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया।
सूत्रों के अनुसार बीड़ा में 90ए की फाइलें तेजी से दौड़ी हैं और कई मामलों में नियमों की अनदेखी कर भूमि का उपयोग बदला गया। आरोप है कि कुछ अधिकारियों ने अपने कार्यकाल के दौरान प्रभावशाली लोगों को लाभ पहुंचाने के लिए प्रक्रियाओं में ढील दी। यही वजह है कि अब जब जानकारी मांगी जा रही है, तो फाइलों को सार्वजनिक करने से बचा जा रहा है। अधिकारियों का तर्क है कि तीसरे पक्ष की सहमति के बिना सूचना देना संभव नहीं है, जबकि जानकारों का कहना है कि 90ए जैसी प्रक्रियाएं सार्वजनिक हित से जुड़ी होती हैं और इनकी जानकारी छिपाना नियमों के खिलाफ है।
आरटीआई लगाने के बाद यह भी सामने आया कि विभागीय शाखाएं आपस में ही जानकारी साझा नहीं कर रहीं। नियमन शाखा ने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि संबंधित सूचना आरटीआई शाखा से मांगी जाए, जबकि आरटीआई शाखा ने तीसरे पक्ष का हवाला देकर जवाब देने से इनकार कर दिया। इस आपसी तालमेल की कमी ने पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
स्थानीय लोगों और आरटीआई कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि सब कुछ नियमों के अनुसार हुआ है, तो जानकारी देने से डरने की जरूरत नहीं होनी चाहिए। 90ए से जुड़े मामलों में पारदर्शिता न होने से यह आशंका गहराती जा रही है कि कहीं न कहीं बड़े स्तर पर गड़बड़ियां हुई हैं। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि उच्च अधिकारी इस मामले में क्या कदम उठाते हैं और क्या बीड़ा में 90ए से जुड़ी सच्चाई आम लोगों के सामने आ पाएगी या नहीं।

















