हरियाणा सरकार ने प्रदेश में सिंचाई व्यवस्था को और सुदृढ़ बनाने के लिए बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में हुई बैठक में नहरों की माइनरों की री-मॉडलिंग और सुधार की व्यापक योजना को मंजूरी दी गई। इस योजना पर लगभग 315 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे, जिसके तहत 54 परियोजनाओं को लागू किया जाएगा। इसमें 30 नहरों का पुनर्वास और 24 नहरों की री-मॉडलिंग की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि नहरों की गहराई और चौड़ाई बढ़ाकर उन्हें आधुनिक तकनीक से मजबूत किया जाए ताकि किसानों तक समय पर पानी पहुंच सके। योजना पूरी होने पर भूमिगत जलस्तर पर दबाव कम होगा, फसल उत्पादन बढ़ेगा और ग्रामीण इलाकों में पानी जमने की समस्या दूर होगी।
परियोजनाओं में माइनरों के किनारों को मजबूत करने, लाइनिंग की मरम्मत, पाइपलाइन बिछाने, हेड रेगुलेटर, साइफन, पुलिया और आउटलेट की मरम्मत जैसे कार्य शामिल होंगे। इससे पानी की लीकेज कम होगी और सिंचाई जल की बचत सुनिश्चित होगी।
बैठक में दी गई जानकारी के अनुसार, यमुना वाटर सर्विस सर्कल भिवानी के तहत 41, करनाल सर्कल में 1, रोहतक सर्कल में 2, लोहारू वाटर सर्विस सर्कल भिवानी में 7 और जवाहरलाल नेहरू सर्कल रेवाड़ी में 3 परियोजनाएं ली जाएंगी।
नाबार्ड की मदद से पूरी की जाने वाली इन परियोजनाओं से भिवानी, रोहतक, जींद, चरखी दादरी, रेवाड़ी, सोनीपत और करनाल जिलों में किसानों को पानी की आपूर्ति बेहतर ढंग से मिल पाएगी। बैठक में मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी, मुख्यमंत्री के मुख्य प्रधान सचिव राजेश खुल्लर, वित्त विभाग के आयुक्त सीजी रजनीकांथन समेत वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

















