हरियाणा सरकार द्वारा 22 जिलों में तैनात जिला अटॉर्नी को सीधे दो स्तर ऊपर डिप्टी डायरेक्टर ऑफ प्रॉसीक्यूशन (DDP) के पद पर पदोन्नत किए जाने का मामला अब पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट पहुंच गया है। इस विवाद को लेकर हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता प्रदीप कुमार रापड़िया ने एक याचिका दायर की है, जिस पर आज सुनवाई करते हुए अदालत ने हरियाणा सरकार को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
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दरअसल, हरियाणा सरकार के गृह विभाग ने करीब 16 दिन पहले एक आदेश जारी कर 22 जिलों में कार्यरत जिला अटॉर्नी को असिस्टेंट डायरेक्टर ऑफ प्रॉसीक्यूशन (ADP) बनाए बिना सीधे डिप्टी डायरेक्टर ऑफ प्रॉसीक्यूशन (DDP) के पद पर पदोन्नत कर दिया। यह प्रमोशन वरिष्ठता के आधार पर किए गए हैं और सभी अधिकारी एक वर्ष की परिवीक्षा अवधि पर रहेंगे।
विवाद का एक अहम पहलू वेतनमान से भी जुड़ा हुआ है। एडवोकेट हेमंत कुमार के अनुसार, 31 दिसंबर को जारी आदेश में DDP का वेतनमान ₹1,23,100 से ₹2,15,900 दर्शाया गया है, जो कि डायरेक्टर ऑफ प्रॉसीक्यूशन के वेतन से भी अधिक बताया जा रहा है। इस कथित विसंगति को लेकर उन्होंने 12 जनवरी को गृह विभाग की अपर मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा को पत्र लिखकर संज्ञान में लिया है।
याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 में स्पष्ट प्रावधान है कि 15 वर्षों का अनुभव रखने वाला कोई भी वकील डिप्टी डायरेक्टर ऑफ प्रॉसीक्यूशन बनने के लिए पात्र होता है। हरियाणा सरकार ने ऐसे नियम बना दिए हैं, जिनके तहत केवल सरकारी वकील के रूप में कार्यरत व्यक्तियों को ही पदोन्नति के जरिए DDP बनाया जा सकता है।

















