Haryana: गुरुग्राम में मेट्रो नेटवर्क के विस्तार के साथ अब उन क्षेत्रों के लोगों को बड़ी राहत मिलने वाली है जो मेट्रो लाइन से जुड़े हैं। ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट (TOD) नीति के तहत इन इलाकों में विकास कार्यों को नई दिशा मिलेगी। सरकार ने इस नीति के अंतर्गत नए मेट्रो स्टेशनों के मार्गों को अधिसूचित करने की तैयारी शुरू कर दी है। कई मेट्रो स्टेशनों की अधिसूचना पहले ही जारी की जा चुकी है, जबकि शेष स्टेशनों की अधिसूचना जल्द जारी होगी। इस नीति के तहत शहरों के विकास का फोकस अब सड़क-आधारित ढांचे से हटकर मेट्रो और सार्वजनिक परिवहन नेटवर्क के इर्द-गिर्द केंद्रित विकास पर रहेगा। इसका मुख्य उद्देश्य लोगों को निजी वाहनों पर निर्भरता कम करने, ट्रैफिक जाम घटाने और पर्यावरण के अनुकूल शहरी विकास को बढ़ावा देना है।
टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग की डीटीपी (मुख्यालय) दिव्या डोगरा ने बताया कि TOD एक ऐसी शहरी विकास नीति है जिसके तहत आवासीय, वाणिज्यिक और संस्थागत क्षेत्रों का विकास मेट्रो या रैपिड रेल जैसी सार्वजनिक परिवहन प्रणालियों के आसपास केंद्रित किया जाता है। इसका उद्देश्य नागरिकों को इस तरह की जगहों पर बसाना है जहाँ उन्हें रोजाना के आवागमन में न तो लंबी दूरी तय करनी पड़े और न ही निजी वाहनों पर निर्भर रहना पड़े। हरियाणा सरकार ने इस नीति को फिलहाल गुरुग्राम, फरीदाबाद, सोनीपत और बहादुरगढ़ जैसे शहरी क्षेत्रों में लागू किया है। इन इलाकों में मेट्रो और रैपिड रेल कॉरिडोर के दोनों ओर 800 मीटर की परिधि में TOD ज़ोन बनाए गए हैं, जहाँ विकास कार्य नीति के अनुरूप किए जा रहे हैं।
डेवलपर्स, निवेशकों और आम नागरिकों को कैसे मिलेगा लाभ
TOD नीति के अंतर्गत डेवलपर्स को अधिक फ्लोर एरिया रेशियो (FAR) यानी एक ही जमीन पर अधिक निर्माण की अनुमति दी गई है। इससे बिल्डरों को अधिक यूनिट्स बनाने का मौका मिलेगा और निवेश को भी बढ़ावा मिलेगा। साथ ही, परियोजनाओं की मंजूरी की प्रक्रिया को सरल और तेज़ कर दिया गया है, जिससे विकास कार्यों की गति बढ़ेगी। आम नागरिकों के लिए यह नीति बेहतर कनेक्टिविटी और सुविधाजनक जीवनशैली लेकर आएगी। मेट्रो स्टेशन या रैपिड रेल कॉरिडोर के पास रहने से रोजाना यात्रा में समय और पैसा दोनों की बचत होगी। साथ ही, लोगों को दफ्तर, स्कूल, बाजार और मनोरंजन स्थल एक ही परिधि में मिलेंगे, जिससे जीवन अधिक संतुलित और आरामदायक बनेगा। इस नीति से ग्रीन मोबिलिटी यानी पैदल चलना और साइकिलिंग को भी बढ़ावा मिलेगा।
पर्यावरण संरक्षण और शहरी नियोजन में आएगा बड़ा बदलाव
TOD नीति का एक प्रमुख लक्ष्य प्रदूषण और ईंधन खपत में कमी लाना है। जब लोग निजी वाहनों की जगह मेट्रो, बस या रैपिड रेल का उपयोग करेंगे, तो इससे वायु प्रदूषण घटेगा। इसके साथ ही, नीति में हरे-भरे खुले स्थान, पैदल पथ और साइकिल ट्रैक बनाने का प्रावधान है, जिससे शहरों में गर्मी और धूल की समस्या कम होगी। पहले शहरी विकास का केंद्र सड़कें होती थीं, लेकिन अब TOD नीति से विकास का रुख ट्रांजिट-आधारित कॉम्पैक्ट सिटी मॉडल की ओर जा रहा है। इससे शहरों में अनियोजित फैलाव (urban sprawl) रुक जाएगा और ऊर्ध्व (vertical) विकास, स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर और क्लस्टर डेवलपमेंट को प्रोत्साहन मिलेगा। हरियाणा की TOD नीति के अनुसार, मेट्रो या रैपिड रेल कॉरिडोर से 0–500 मीटर तक के क्षेत्र को Intense TOD Zone माना गया है, जहाँ 3.5 FAR तक निर्माण की अनुमति है। वहीं 500–800 मीटर के Transition Zone में 2.5 FAR की अनुमति दी गई है। इसका सीधा लाभ हाउसिंग सोसायटियों और व्यावसायिक परियोजनाओं को मिलेगा, जहाँ अतिरिक्त मंज़िलें और यूनिट्स बनाई जा सकेंगी।

















