Haryana: औद्योगिक शहर (Industrial City) में अब पड़ोसी जिलों — ग्रेटर नोएडा और नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट — से सीधी और आसान कनेक्टिविटी मिलने वाली है। इसके साथ ही फरीदाबाद-नोएडा-गाज़ियाबाद कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट पर भी काम शुरू होने जा रहा है। वहीं दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पहले से ही चालू हो चुका है। इन्हीं परियोजनाओं के बहाने अब कॉलोनाइज़र अवैध कॉलोनियों का विकास तेज़ी से कर रहे हैं। लोगों को यह कहकर लुभाया जा रहा है कि इलाके की लोकेशन बेहतरीन है और कुछ ही महीनों में जमीन की दरें 25,000 से 30,000 रुपये प्रति गज तक पहुँच जाएंगी। इन लालच भरे दावों के चलते हजारों लोग प्लॉट खरीद रहे हैं और मकान बनवा रहे हैं। कई ऐसी कॉलोनियाँ हैं जहाँ औद्योगिक भूखंड भी बेचे जा रहे हैं, जिससे भविष्य में मास्टर प्लान की संरचना खतरे में पड़ सकती है।
मास्टर प्लान 2031 को बड़ा खतरा, बढ़ी अवैध प्लॉटिंग
पिछले दो सालों में शहर के आसपास कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट्स की घोषणा के बाद कृषि भूमि की खरीद-फरोख्त में जबरदस्त इज़ाफ़ा हुआ है। यही वजह है कि अब डिस्ट्रिक्ट टाउन प्लानर (DTP) और इंफोर्समेंट विभाग सक्रिय हो गए हैं। कई कॉलोनियों में दो महीने के भीतर कार्रवाई की गई, जहाँ बड़े-बड़े शेड्स के नीचे फैक्ट्रियाँ संचालित की जा रही थीं। अवैध कॉलोनियों के फैलाव से मास्टर प्लान 2031 को गंभीर खतरा है। इस योजना के तहत तय किया गया है कि कौन सी गतिविधियाँ किस क्षेत्र में होंगी, लेकिन अवैध प्लॉटिंग के कारण सेक्टर सड़कों और मास्टर रोड्स का निर्माण प्रभावित हो सकता है। प्रशासन का कहना है कि अवैध निर्माण को किसी भी स्थिति में नहीं बढ़ने दिया जाएगा, ताकि भविष्य में इन्हें हटाने की नौबत न आए।
कॉल सेंटर्स के ज़रिए लोगों को फंसाने की कोशिश
अवैध कॉलोनाइज़र अब आधुनिक ठगी के तरीके अपनाने लगे हैं। कई लोगों ने ग्रामीण इलाकों में कृषि भूमि खरीदकर कॉलोनियाँ विकसित की हैं और इनकी प्रमोशन टीमें अब लोगों को फोन कर प्लॉट बेचने की पेशकश कर रही हैं। इन कॉल सेंटर्स में युवतियाँ काम करती हैं, जो जनता को आसान किश्तों पर प्लॉट उपलब्ध कराने का झांसा देती हैं। सोशल मीडिया, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स और घरों पर बाँटे जा रहे पैम्फलेट्स के ज़रिए भी ये योजनाएँ लगातार प्रचारित की जा रही हैं। इन लालच भरे ऑफर्स के चलते न सिर्फ़ फरीदाबाद बल्कि दिल्ली, गुरुग्राम और ग्रेटर नोएडा के लोग भी ऐसे प्लॉट खरीदने लगे हैं। प्रशासन ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि ऐसी कॉलोनियों में निवेश करने से पहले पूरी जांच कर लें, वरना भारी नुकसान झेलना पड़ सकता है।
इंडस्ट्रियल सिटी और रेजिडेंशियल जोन पर संकट के बादल
फरीदाबाद और पलवल के नौ गाँवों — चैनसा, मोहना, मोहियापुर, बाघपुर कलां, बाघपुर खुर्द, बहारौला, हंसरपुर, सोल्दा और थंथरी — में हरियाणा राज्य औद्योगिक एवं अवसंरचना विकास निगम (HSIIDC) द्वारा औद्योगिक नगर बसाने की योजना है। यहाँ करीब 9,000 एकड़ भूमि अधिग्रहित की जानी है। साथ ही, हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (HSVP) भी अपने सेक्टर क्षेत्र का विस्तार कर रहा है, जिसके लिए 18 गाँवों से 4,500 एकड़ भूमि अधिग्रहित की जाएगी। इन गाँवों में सेक्टर 94A, 96, 96A, 99, 100, 101, 102, 103, 140, 141 और 142 विकसित किए जाने हैं, जिनमें आवासीय और वाणिज्यिक दोनों सेक्टर शामिल होंगे। प्रशासन ने बताया कि पिछले तीन महीनों में 35 से अधिक बार कार्रवाई की जा चुकी है। एक्सप्रेसवे के आसपास की कॉलोनियों पर लगातार नज़र रखी जा रही है। जिला प्रशासन ने जनता से अपील की है कि वे अवैध कॉलोनियों में प्लॉट न खरीदें, क्योंकि ये न केवल अवैध हैं बल्कि भविष्य में मास्टर प्लान 2031 के विकास कार्यों में गंभीर बाधा बन सकती हैं।

















