दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) ने आम लोगों के लिए बड़ी राहत की घोषणा की है। अब वह सर्जरी जो निजी अस्पतालों में 15 से 20 लाख रुपये तक की होती थी, वह केवल 20 हजार रुपये में हो सकेगी। एम्स ने यह सुविधा अपने लो- कॉस्ट एडवांस्ड सर्जरी प्रोग्राम के तहत शुरू की है। इसका उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर तबके को अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाएं सुलभ दामों पर देना है।
एम्स प्रशासन के अनुसार इस योजना में मरीजों को उच्च तकनीक वाली रोबोटिक और लेप्रोस्कोपिक सर्जरी बेहद कम कीमत पर उपलब्ध कराई जाएगी। सामान्य तौर पर इन सर्जरी पर निजी अस्पतालों में लाखों रुपये खर्च होते हैं। अब एम्स में यह सरकारी दरों पर उपलब्ध होंगी। शुरुआती चरण में यह सुविधा न्यूरोसर्जरी, ऑर्थोपेडिक, गेस्ट्रो, यूरोलॉजी और कैंसर सर्जरी विभागों में शुरू की गई है।
एम्स के निदेशक डॉ. एम. श्रीनिवास ने बताया कि इस योजना का उद्देश्य सिर्फ खर्च कम करना नहीं है, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं को समाज के हर वर्ग तक पहुंचाना है। उनका कहना है कि किसी भी मरीज का इलाज सिर्फ इसलिए न रुके कि उसके पास पैसे नहीं हैं। एम्स हमेशा से गरीब और जरूरतमंद मरीजों की सेवा के लिए समर्पित रहा है।
डॉ. श्रीनिवास ने बताया कि आधुनिक रोबोटिक सर्जरी में अब भारतीय तकनीशियनों और इंजीनियरों की मदद से लागत काफी कम हो गई है। आयातित उपकरणों पर निर्भरता कम हुई है और मरीजों का खर्च 95 फीसदी तक घट गया है।
मरीजों के लिए राहत की बात यह है कि इस योजना में दवाओं, जांच और भर्ती का खर्च भी एम्स की सामान्य दरों पर ही रहेगा। जरूरतमंद मरीज आयुष्मान भारत और अन्य सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं के तहत इसका लाभ ले सकेंगे। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह मॉडल सफल होता है, तो इसे देश के अन्य सरकारी अस्पतालों में भी लागू किया जा सकता है। इससे लाखों गरीब मरीजों को जीवन रक्षक इलाज का मौका मिलेगा, जो अब तक महंगे इलाज की वजह से संभव नहीं था।
















