धारूहेड़ा/रेवाड़ी: अलवर बाइपास रैंप विवाद अब प्रशासनिक फैसलों से आगे बढ़कर जनता की भावनाओं और आक्रोश का मुद्दा बन चुका है। धारूहेड़ा की जनता पूछ रही है कि जब राजस्थान के लोग रैंप तोड़ने की धमकी दे रहे हैं और पहले भी इसे नुकसान पहुंचा चुके हैं, तो हरियाणा का प्रशासन चुप क्यों बैठा है? सवाल यह भी है कि रेवाड़ी के डीसी और हरियाणा सरकार इस रैंप को बचाने के लिए कोई ठोस पहल क्यों नहीं कर रहे हैं? Alwar bypass ramp
स्थानीय लोगों का कहना है कि वे पिछले 25 वर्षों से भिवाड़ी के काले पानी से परेशान हैं। एनजीटी तक ने जुर्माना लगाया, थाने में रिपोर्ट दर्ज हुई, लेकिन नतीजा कुछ नहीं निकला। अब जब रैंप बना तो सिर्फ दो साल में ही राजस्थान प्रशासन फिर से पानी हरियाणा में डालने की कोशिश में जुटा है, और रैंप हटाने की साजिश रची जा रही है। Alwar bypass ramp
जनता का गुस्सा इस बात को लेकर भी है कि राजस्थान में आज तक STP (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) पूरी तरह से चालू नहीं हो पाया, जबकि 80% से ज्यादा इंडस्ट्रीज में आज भी ETP/STP नहीं है। फिर भी केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव और राजस्थान प्रशासन धारूहेड़ा पर दबाव बनाकर अपने गंदे पानी के लिए रास्ता मांग रहे हैं।Alwar bypass ramp
धारूहेड़ा के नागरिक पूछ रहे हैं कि रेवाड़ी के डीसी को धारूहेड़ा की चिंता क्यों नहीं है? क्या केवल भिवाड़ी की रिपोर्टों पर फैसले होंगे? क्या मुख्यमंत्री मनोहर लाल के वे दावे खोखले थे, जिनमें कहा गया था कि “काले पानी की एंट्री बंद रहेगी”? Alwar bypass ramp
सवाल यह भी उठ रहा है कि अगर STP बनाना ही है, तो वह भिवाड़ी में क्यों नहीं बनता? हरियाणा में क्यों? क्या धारूहेड़ा काले पानी का डंपिंग ग्राउंड है? जनता को यह भी शिकायत है कि राव इंद्रजीत सिंह की आवाज को दबाने की कोशिश की जा रही है, जिन्होंने पहले ही इस मुद्दे को संसद और विभिन्न मंचों पर उठाया था।Alwar bypass ramp
धारूहेड़ा के लोग आज यह जानना चाहते हैं कि जब उनकी भूमि, उनका स्वास्थ्य, और उनका भविष्य दांव पर है, तो नेताओं और अफसरों की चुप्पी किसके दबाव में है? क्यों बार-बार भिवाड़ी के हित में फैसले लिए जा रहे हैं और धारूहेड़ा की आवाज अनसुनी की जा रही है?
13 जुलाई को महापंचायत की घोषणा हो चुकी है। अब यह केवल रैंप की बात नहीं रही, यह स्वाभिमान और संरक्षण का मुद्दा बन चुका है। यदि प्रशासन ने समय रहते जनभावनाओं को नहीं समझा, तो आने वाले दिनों में यह विवाद और भी व्यापक रूप ले सकता है।

















