Pitru Paksha: पितरों की आत्मा की शांति के लिए तर्पण, पिंडदान और करें श्राद्ध, यहां पढे सही समय

On: September 9, 2025 7:59 PM
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Pitru Paksha : पितृ पक्ष 2025 के दौरान पितरों की आत्मा की शांति के लिए तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध जैसे कर्म किए जाते हैं. इस समय पितर धरती पर आते हैं और अपने वंशजों से तर्पण की अपेक्षा रखते हैं, इस अवधि में पवित्र नदियों में स्नान करना और जरूरतमंदों को दान देना विशेष फलदायक माना जाता है, पितृ पक्ष में विधिपूर्वक श्राद्ध कर्म करने से पितरों को मुक्ति मिलती है .Pitru Paksha

परिवार की कृपा जीवन में सुख-शांति लाती है, इस वर्ष पितृपक्ष की शुरुआत 7 सितंबर 2025, रविवार को हुई है, भाद्रपद माह की पूर्णिमा तिथि 7 सितंबर को देर रात 01:41 बजे प्रारंभ और इसी दिन रात 11:38 बजे समाप्त हो जाएगी, ऐसे में 7 सितंबर से ही पितृ पक्ष की विधिवत शुरुआत मानी जाएगी, पितृ पक्ष का समापन 21 सितंबर 2025 को सर्व पितृ अमावस्या के दिन होगा, Breaking News
पितृ पक्ष 2025 की तारीखें निम्नलिखित हैं।
– रविवार, 7 सितंबर – पूर्णिमा श्राद्ध
– ⁠सोमवार, 8 सितंबर – प्रतिपदा श्राद्ध
– मंगलवार, 9 सितंबर – द्वितीया श्राद्ध
– बुधवार, 10 सितंबर – तृतीया श्राद्ध, चतुर्थी श्राद्ध
– गुरुवार, 11 सितंबर – पंचमी श्राद्ध,
– शुक्रवार, 12 सितंबर – षष्ठी श्राद्ध
– शनिवार, 13 सितंबर – सप्तमी श्राद्ध
– रविवार, 14 सितंबर – अष्टमी श्राद्ध
– सोमवार, 15 सितंबर – नवमी श्राद्ध
– मंगलवार, 16 सितंबर – दशमी श्राद्ध
– बुधवार, 17 सितंबर – एकादशी श्राद्ध
– गुरुवार, 18 सितंबर – द्वादशी श्राद्ध
– शुक्रवार, 19 सितंबर – त्रयोदशी श्राद्ध,
– शनिवार, 20 सितंबर – चतुर्दर्शी श्राद्ध
– रविवार, 21 सितंबर – सर्व पितृ अमावस्या श्राद्ध
पितृ पक्ष का मतलब पितृ पक्ष, जिसे श्राद्ध पक्ष भी कहा जाता है, एक 16 दिनों की अवधि है जो हिंदू धर्म में पितरों को समर्पित है, यह भाद्रपद पूर्णिमा से शुरू होकर आश्विन अमावस्या तक चलता है, इस दौरान पितरों की आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान जैसे धार्मिक कर्म किए जाते हैं, पितर धरती पर आते हैं और अपने वंशजों से तर्पण की अपेक्षा रखते हैं, संतान अमर हो जाती है, इस समय पवित्र नदियों में स्नान करना अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है,Breaking News

दान और पवित्र नदियों का जल पितरों को तृप्त करता है, पितृ पक्ष में विधि-विधान से किए गए कर्म से पितरों को मुक्ति मिलती है, इसके लिए किसी भी दिन श्राद्ध किया जा सकता है, परंतु किसी खास तिथि के लिए उसी तिथि को श्राद्ध करना अधिक शुभ माना जाता है, जैसे कि काकल में गंगा स्नान, ब्राह्मण भोज और दान करना विशेष फलदायक है, पितरों की कृपा से परिवार में सुख, संतान सुख और समृद्धि आती है, इस दौरान पितरों की पूजा का जो महत्व है उसे श्रद्धा और आस्था से निभाना आवश्यक है।

Harsh

हर्ष चौहान पिछले तीन साल से पत्रकारिता में कार्यरत हूं। इस साइट के माध्यम से अपराध, मनोरंजन, राजनीति व देश विदेश की खबरे मेरे द्वारा प्रकाशित की जाती है। मै बतौर औथर कार्यरत हूं

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