Haldwani Railway Land Case: भगवान के घर देर है अंदेर नहीं। सुप्रीम कोर्ट ने नैनीताल हाई कोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी है। इतना ही सुप्रीम कोर्ट ने इसके साथ ही राज्य सरकार और रेलवे को नोटिस भी जारी किया है।
इतने हजार लोग हो जाते बेधर: उत्तराखंड के पूर्व सीएम हरीश रावत ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला मानवाधिकार की सुरक्षा करेगा। हम सभी विध्वंस के बारे में चिंतित थे जिससे 52,000 लोग बेघर हो जाते। सुप्रीम कोर्ट ने विध्वंस पर रोक लगा दी। साल 2016 में हमने लोगों के पुनर्वास को लेकर फैसला लिया था।हरियाणा में सर्दी का सितम, तापमान गिरा, IMD ने किया Red Alert
जानिए क्या दिया हाईकोर्ट ने आदेश?
पिछले साल 20 दिसंबर को नैनीताल हाईकोर्ट की बेंच ने रेलवे को आदेश में कहा कि वे जमीने खाली करने के लिए एक हफ्ते का समय देने के बाद गलत तरीके से कब्जा जमाए रखने वालों को हटाने के लिए किसी भी हद तक बल का उपयोग कर सकते हैं।
रेलवे की जमीन पर बसे हैं 4 हजार परिवार
हल्द्वानी में जिस जमीन को लेकर विवाद हो रहा है,उसपर चार हजार परिवार बसे हुए हैं। रेलवे का कहना है कि उनके पास पुराने नक्शे और रिवेन्यू रिकॉर्ड हैं, जो जमीन पर उनका दावा साबित करते हैं। हालांकि विरोध कर रहे लोगों का दावा है कि वो यहां पीढ़ियों से रहते हैं।
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हल्द्वानी में नैनीताल हाईकोर्ट के आदेश के बाद से ही तनाव था। विवादित स्थल पर तभी से विरोध प्रदर्शनों का दौर शुरू हो गया था। यहां हाई कोर्ट के फैसले के बाद 8 जनवरी को बुलडोजर चलना था, जिसपर अब सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है।
स्कूल कॉलेज का तोडना गलत: सुप्रीम कोर्ट में याचिकाकर्ताओं की वकील लुबना नाज ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस जमीन पर कोई निर्माण नहीं किया जाएगा। पुनर्वास योजना को ध्यान में रखा जाना चाहिए। वहां स्कूल, कॉलेज और अन्य अन्य ठोस संरचनाएं हैं जिन्हें इस तरह ध्वंस नहीं किया जा सकता।















