EPFO: केंद्र सरकार के बजट 2026 में निजी क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत मिलने वाली है। लंबे समस प्रस्तावित बदलाव के तहत कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के अंतर्गत पीएफ कटौती के लिए मौजूदा सैलरी लिमिट 15 हजार रुपये प्रति माह से बढ़ाकर 25 हजार रुपये प्रति माह किए जाने की संभावना है। आशंका है कि यह प्रस्ताव लागू होता है तो यह व्यवस्था 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी हो सकती है।EPFO
कोर्ट के आदेश होगा तय’ बतर दे कि सुप्रीम कोर्ट के हालिया आदेशों और सरकार की सोशल सिक्योरिटी को मजबूत करने की मंशा के चलते इस बदलाव की प्रबल संभावना जताई जा रही है।
वर्तमान में EPFO के नियमों के अनुसार 15 हजार रुपये मासिक वेतन तक के कर्मचारियों के लिए पीएफ कटौती अनिवार्य है। सैलरी लिमिट बढ़ने के बाद 25 हजार रुपये तक वेतन पाने वाले कर्मचारियों को भी अनिवार्य रूप से पीएफ के दायरे में लाया जाएगा।
लाखों कर्मचारियों को होगा फायदा: बता दे कि निजी कर्मचारियों को भविष्य निधि, कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) और कर्मचारी जमा लिंक्ड बीमा योजना (EDLI) का सीधा लाभ मिलेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे निजी क्षेत्र में काम करने वाले कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा पहले से कहीं अधिक मजबूत होगी। इतना ही नहीं सैलरी लिमिट बढने सें पेंशन भी बढ जाएगी।
इस प्रस्ताव का सकारात्मक पक्ष यह है कि अधिक संख्या में कर्मचारी सोशल सिक्योरिटी के दायरे में आएंगे और उनकी लंबी अवधि की बचत मजबूत होगी। इतना ही नहीं सेवानिवृति पर मिलने वाली पेंशन में बढोतरी होगी।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद जागा EPFO: क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में ईपीएफओ (EPFO) को चार महीने में सैलरी लिमिट में बदलाव करने का आदेश दिया गया था। अदालत ने कहा कि बढ़ती सैलरी और महंगाई के कारण बड़ी संख्या में लोग सोशल सिक्योरिटी से दूर हैं। करीब 10 साल से भी ज्यादा टाइम से पुरानी लिमिट बनी हुई है। इसको बढाया जाये
कंपनियों का बढ़ेगा खर्च EPFO
कंपनियों की तरफ से कर्मचारियों जितना योगदान देना जरूरी होता है. यदि इस प्रस्ताव को लागू किया जाता है तो मजदूरों पर निर्भर रहने वाले सेक्टर का पेरोल पर खर्च बढ़ सकता है. कई कंपनियां इसको लेकर चिंतित हैं लेकिन सरकार का कहना है इससे कर्मचारियों को फायदा मिलेगा. मिनिमम वेज की नई लिमिट लागू होने पर पीएफ जमा राशि, पेंशन कॉन्ट्रीब्यूशन और ईपीएफओ से जुड़ा इंश्योरेंस कवर सब नए सैलरी लेवल के हिसाब से होंगे. इससे नौकरीपेश को ज्यादा मजबूत सोशल सिक्योरिटी मिल सकेगी

















