Haryana का औद्योगिक शहर बहादुरगढ़, जिसे देश के प्रमुख फुटवियर हब के रूप में जाना जाता है, इन दिनों अंतरराष्ट्रीय हालातों के कारण गंभीर आर्थिक दबाव का सामना कर रहा है। पश्चिम एशिया में जारी इजरायल-ईरान युद्ध का असर अब स्थानीय उद्योगों तक पहुंच गया है। युद्ध के कारण कच्चे माल की सप्लाई प्रभावित हो रही है और कीमतों में अचानक तेज बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। इसका सीधा असर जूते-चप्पलों के निर्माण और उनकी बाजार कीमतों पर पड़ रहा है। उद्योग से जुड़े उद्यमियों ने बढ़ती लागत के चलते उत्पादों के दाम 10 से 20 प्रतिशत तक बढ़ाने का फैसला किया है।
बहादुरगढ़ फुटवियर एसोसिएशन की हाल ही में हुई बैठक में इस मुद्दे पर गंभीर चर्चा की गई। बैठक में शामिल उद्यमियों ने सर्वसम्मति से फैसला लिया कि उत्पादन लागत में तेजी से हो रही वृद्धि को देखते हुए कीमतों में बढ़ोतरी अनिवार्य हो गई है। एसोसिएशन के पदाधिकारियों का कहना है कि यदि यह कदम नहीं उठाया गया तो कई छोटे और मध्यम उद्योगों के लिए उत्पादन जारी रखना मुश्किल हो जाएगा।
कच्चे माल की सप्लाई प्रभावित, लागत में भारी उछाल ?
बहादुरगढ़ फुटवियर एसोसिएशन के महासचिव सुभाष जग्गा के अनुसार जूता उद्योग में उपयोग होने वाला अधिकांश कच्चा माल विदेशों से आयात किया जाता है। इसमें पी.यू., ई.वी.ए., रैग्जिन और अन्य सिंथेटिक पदार्थ शामिल हैं। पश्चिम एशिया में युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन प्रभावित हुई है, जिससे इन सामग्रियों की उपलब्धता कम हो गई है। इसके साथ ही स्टॉकिस्टों ने कच्चे माल की कीमतों में करीब 50 प्रतिशत तक बढ़ोतरी कर दी है।
उन्होंने बताया कि पहले जहां इन सामग्रियों की नियमित सप्लाई हो जाती थी, वहीं अब उद्योगों को समय पर कच्चा माल नहीं मिल पा रहा है। इसके कारण कई फैक्टरियों को उत्पादन कम करना पड़ रहा है। कुछ इकाइयों ने तो अस्थायी रूप से उत्पादन भी घटा दिया है। उद्योग जगत का मानना है कि अगर हालात जल्दी सामान्य नहीं हुए तो रोजगार और निर्यात पर भी इसका असर पड़ सकता है।
एमएसएमई नियमों और युद्ध के दोहरे दबाव में उद्योग ?
सुभाष जग्गा ने यह भी बताया कि जूता उद्योग पहले से ही कई आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहा था। एमएसएमई नियमों के तहत 45 दिनों के भीतर भुगतान की अनिवार्यता ने उद्योगों पर अतिरिक्त दबाव बना दिया है। छोटे और मध्यम स्तर के उद्योगों के लिए नकदी प्रवाह बनाए रखना पहले ही कठिन था, ऐसे में कच्चे माल की बढ़ती कीमतों ने स्थिति को और जटिल बना दिया है।
युद्ध के कारण बने हालातों ने उद्योग की लागत संरचना को पूरी तरह प्रभावित कर दिया है। उद्योगपतियों का कहना है कि कीमतों में की गई 15 से 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी मुनाफा कमाने के लिए नहीं बल्कि उत्पादन जारी रखने की मजबूरी है। यदि यह कदम नहीं उठाया जाता तो कई इकाइयों को बंद करने की नौबत आ सकती थी।
केमिकल उद्योग और बाजार में पैनिक का असर ?
फुटवियर उद्योग के साथ-साथ केमिकल उद्योग भी इस संकट से प्रभावित हुआ है। सार ग्लोबल के डायरेक्टर राजेश कुमार के अनुसार पेट्रो-केमिकल आधारित कच्चे माल और सॉल्वेंट की सप्लाई लगभग ठप हो चुकी है। रिफाइनरियों से मिलने वाले कई महत्वपूर्ण रसायनों की उपलब्धता कम हो गई है, जिससे उत्पादन प्रभावित हो रहा है। इसके अलावा कई फैक्टरियों में गैस सप्लाई भी बाधित हो गई है, जिसके कारण उत्पादन क्षमता घटकर लगभग 60 प्रतिशत रह गई है।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि हालात लंबे समय तक ऐसे ही बने रहे तो कई उद्योगों को अस्थायी रूप से बंद करना पड़ सकता है। इससे न केवल उत्पादन प्रभावित होगा बल्कि हजारों लोगों के रोजगार पर भी असर पड़ सकता है।
पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी का असर भी बाजार में साफ दिखाई दे रहा है। दिल्ली के करोल बाग स्थित फुटवियर एसोसिएशन ने देशभर के व्यापारियों को कीमतों में संभावित बढ़ोतरी के लिए तैयार रहने का संदेश जारी किया है। एसोसिएशन के सदस्य लकी अरोड़ा के अनुसार पीवीसी, पीयू, ईवीए, पैकिंग सामग्री और डनलप जैसे कच्चे माल की कीमतों में तेजी आ गई है। इसके कारण हर जोड़ी जूते की लागत बढ़ गई है और बाजार में प्रति जोड़ी लगभग 10 से 15 रुपये तक की बढ़ोतरी देखी जा रही है।
दूसरी ओर रिटेल बाजार में भी इसका असर दिखाई दे रहा है। कुरुक्षेत्र के फुटवियर दुकानदार राकेश कुमार का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण बाजार में पैनिक का माहौल बन गया है। थोक व्यापारियों ने भी कीमतें बढ़ा दी हैं, जिसका सीधा असर उपभोक्ताओं पर पड़ रहा है।
बहादुरगढ़: देश का प्रमुख फुटवियर हब ?
बहादुरगढ़ को देश के बड़े फुटवियर उत्पादन केंद्रों में गिना जाता है। यहां करीब 1500 से अधिक जूता निर्माण और उससे जुड़े उद्योग कार्यरत हैं। इन इकाइयों से हर साल लगभग 700 करोड़ रुपये का निर्यात होता है और कुल उत्पादन करीब 30 हजार करोड़ रुपये तक पहुंचता है। जूता निर्माण के लिए लगभग 5 हजार करोड़ रुपये का कच्चा माल विदेशों से आयात किया जाता है।ऐसे में अंतरराष्ट्रीय हालातों का असर सीधे इस उद्योग पर पड़ना स्वाभाविक है। उद्योग जगत को उम्मीद है कि जल्द ही वैश्विक परिस्थितियां सामान्य होंगी और सप्लाई चेन में सुधार आएगा। फिलहाल बढ़ती लागत और सीमित सप्लाई के बीच उद्योग अपनी उत्पादन क्षमता बनाए रखने की कोशिश कर रहा है।
















