Haryana News: जिला रेवाड़ी के गांव संगवाड़ी निवासी मुकेश शर्मा के तीन नाबालिग बच्चों को निजी स्कूल से आवश्यक शैक्षणिक दस्तावेज न मिलने का मामला सामने आया है। यह प्रकरण बाल विकास विद्यालय, जिला रेवाड़ी से जुड़ा हुआ है, जहां मुकेश शर्मा के तीन बच्चे अनामिका, सुहाना और हनीश पहली कक्षा से शिक्षा ग्रहण कर रहे थे। मुकेश शर्मा गंभीर बीमारी से पीड़ित हैं, उनकी दोनों किडनी फेल हैं और सप्ताह में तीन दिन डायलिसिस पर निर्भर हैं।Haryana News
इसके बावजूद उन्होंने अपने बच्चों की फीस नियमित रूप से जमा कराई। वर्ष 2023 में अनामिका कक्षा दसवीं, सुहाना कक्षा चौथी और हनीश कक्षा दूसरी में अध्ययनरत थे। वर्ष 2024 में अभिभावक ने स्कूल प्रबंधन को सूचित कर दिया था कि अगले सत्र में बच्चों को किसी अन्य स्कूल में दाखिला दिलवाया जाएगा।Haryana News
वर्ष 2024 में अनामिका ने दसवीं कक्षा का ऑनलाइन परिणाम लेकर कक्षा ग्यारहवीं में अन्य स्कूल में प्रवेश लेने का प्रयास किया, जबकि सुहाना और हनीश ने अस्थायी दाखिला लेकर राजकीय स्कूल संगवाड़ी में पढ़ाई शुरू कर दी। हालांकि, बाल विकास विद्यालय द्वारा स्कूल छोड़ने का प्रमाण पत्र और अनामिका की दसवीं की बोर्ड अंकतालिका जारी न करने के कारण तीनों बच्चों का स्थायी दाखिला नहीं हो सका।
अभिभावक द्वारा कई बार स्कूल प्रबंधन से दस्तावेज मांगे गए, लेकिन कथित रूप से अमान्य मदों में फीस की मांग करते हुए दस्तावेज देने से इनकार कर दिया गया। इसके बाद मुकेश शर्मा ने जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय के भी कई चक्कर लगाए, लेकिन वहां से भी समस्या का समाधान नहीं हो पाया।
अंततः अभिभावक ने सामाजिक कार्यकर्ता एवं अधिवक्ता कैलाश चंद से संपर्क किया। अधिवक्ता द्वारा मामले को लेकर 21 जुलाई 2025 को जिला रेवाड़ी न्यायालय में बाल विकास विद्यालय और राजकीय स्कूल संगवाड़ी के खिलाफ वाद दायर किया गया। सुनवाई के दौरान स्कूल की ओर से 3 लाख 40 हजार 274 रुपये फीस बकाया होने का दावा किया गया।
न्यायालयी प्रक्रिया के बाद 22 अगस्त 2025 को सुहाना का स्कूल छोड़ने का प्रमाण पत्र जारी किया गया, जबकि 18 फरवरी 2026 को हनीश की भी SLC जारी कर दी गई। बच्चों के अभिभावक ने अधिवक्ता कैलाश चंद और जिला न्यायालय का आभार जताते हुए कहा कि अधिवक्ता ने उनके बच्चों के मामले की निःशुल्क पैरवी की, जिसके लिए वे हृदय से धन्यवाद प्रकट करते हैं।
















