Haryana Pollution: हरियाणा में वायु प्रदूषण लगातार बढ़ रहा है, लेकिन सरकारी तंत्र इसमें प्रभावी कदम उठाने में असमर्थ दिखाई दे रहा है। कई शहरों में एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 250 के ऊपर दर्ज किया गया है, जबकि कुछ औद्योगिक क्षेत्रों में यह 350 तक पहुँच गया है, जो अत्यंत खराब श्रेणी में आता है। इसके बावजूद राज्य सरकार द्वारा प्रदूषण नियंत्रण के लिए किए गए दावों का प्रभाव वास्तविकता में कम ही दिखाई देता है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) की दो हालिया रिपोर्टें, Redressal Status-1417 और Redressal Hotspot Status-1404, इस स्थिति को स्पष्ट करती हैं। रिपोर्ट के अनुसार, पिछले चार वर्षों (15 अक्टूबर 2021 से 20 अक्टूबर 2025 तक) में राज्य में कुल 2,873 वायु प्रदूषण शिकायतें दर्ज की गईं, जिनमें से केवल 2,332 का समाधान हुआ, यानी केवल 81 प्रतिशत मामलों में ही कार्रवाई हुई। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह धीमी कार्रवाई जारी रही, तो छोटे शहर जल्द ही नए प्रदूषण हॉटस्पॉट बन सकते हैं।
बड़े शहरों में निगरानी बेहतर, छोटे जिलों में कमी
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि गुरुग्राम, फरीदाबाद और बल्लभगढ़ जैसे बड़े शहरों में स्थानीय इकाइयों ने शिकायतों का समय पर समाधान किया। गुरुग्राम में 93 प्रतिशत, फरीदाबाद में 86 प्रतिशत और बल्लभगढ़ में 91 प्रतिशत मामलों का निस्तारण हुआ। इन शहरों में GPS आधारित सफाई वाहन, मोबाइल मॉनिटरिंग यूनिट और डिजिटल रिपोर्टिंग सिस्टम ने कार्रवाई की गति को तेज किया।
इसके विपरीत, हिसार, रोहतक और बहादुरगढ़ में निस्तारण दर 50-60 प्रतिशत रही, जबकि करनाल, पानीपत और यमुनानगर में यह दर 40 प्रतिशत से भी कम रही। छोटे जिलों में संसाधनों की कमी, प्रशिक्षित कर्मियों का अभाव और सीमित मॉनिटरिंग उपकरण (रीयल टाइम मॉनिटरिंग सेंसर और एयर क्वालिटी डैशबोर्ड) इस समस्या के मुख्य कारण हैं।
छोटे शहर बन रहे नए प्रदूषण हॉटस्पॉट
Redressal Hotspot Status – 1404 रिपोर्ट में बताया गया कि पिछले दो वर्षों में हरियाणा के छोटे जिलों में प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ रहा है। हिसार, रोहतक, बहादुरगढ़, करनाल और यमुनानगर अब राज्य के नए प्रदूषण हॉटस्पॉट बन गए हैं। निर्माण कार्य, ईंट भट्टे, कचरा जलाना और बढ़ती ट्रैफिक इन क्षेत्रों में प्रदूषण के मुख्य स्रोत हैं। इन जिलों से प्राप्त शिकायतों का औसत निस्तारण दर 55 प्रतिशत से भी कम रही।
राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की भूमिका पर सवाल
राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (HPCB) का प्रदर्शन दोनों रिपोर्टों में सबसे कमजोर कड़ी के रूप में सामने आया। बोर्ड को प्राप्त केवल 46 प्रतिशत शिकायतों का ही समाधान किया गया। CPCB ने अपनी रिपोर्टों में इस पर गंभीर टिप्पणी की है। विशेषज्ञों का सुझाव है कि HPCB को जिला स्तर पर स्वतंत्र नियंत्रण इकाइयां और पारदर्शी रिपोर्टिंग प्रणाली लागू करनी चाहिए। वर्तमान में रिपोर्टिंग अधिकतर केंद्रीकृत है, जिससे कार्रवाई में देरी और जवाबदेही की कमी बनी हुई है।

















